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| IAS Bharat Yadav Birth Day |
जन्मदिन विशेष : प्रशासनिक सेवा में अभूतपूर्व कार्यों और लोक-कल्याणकारी नवाचारों से समृद्ध एक ऐतिहासिक सफर
प्रशंगवश
डॉ.दीपक राय
मध्य प्रदेश कैडर के 2008 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी भरत यादव किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। 20 जून 1981 को दतिया जिले में जन्मे भरत यादव का जीवन उन युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो अपनी मेहनत, लगन और कड़े परिश्रम के दम पर समाज में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाना चाहते हैं। आज उनके जन्मदिन के विशेष अवसर पर, उनके द्वारा प्रशासनिक सेवा में किए गए अभूतपूर्व कार्यों, संवेदनशीलता और जनहित के नवाचारों को याद करना बेहद लाजिमी हो जाता है। 'पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं' की कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करने वाले भरत यादव बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने कक्षा 5वीं में ही नवोदय विद्यालय की कठिन प्रवेश परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली थी। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी साहित्य (बीए) और राजनीति शास्त्र (एमए) में उच्च शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति उनकी ललक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेलवे में टीटीई की व्यस्त और कठिन नौकरी के दौरान भी उन्होंने अपने अध्ययन को निरंतर जारी रखा और अंततः अपनी कड़ी मेहनत के बल पर देश की सबसे प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान हासिल किया।
आईएएस बनने के बाद भरत यादव की पोस्टिंग अलीराजपुर में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने होशंगाबाद में सहायक कलेक्टर, मुलताई में एसडीएम, नरसिंहपुर में जिला पंचायत सीईओ, उपसचिव नगरीय प्रशासन और प्रोजेक्ट डायरेक्टर 'उदय' के रूप में अपनी सेवाएं दीं। भरत यादव की कार्यशैली शासन और जनता दोनों को इतनी पसंद आई कि उन्हें 7 महत्वपूर्ण जिलों—सिवनी, बालाघाट, जबलपुर, मुरैना, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और नरसिंहपुर में कलेक्टर के रूप में काम मिला। अपनी इस लंबी प्रशासनिक यात्रा में उन्होंने कभी भी अपने ऊपर 'लालफीताशाही' या प्रशासनिक अहंकार को हावी नहीं होने दिया। उनके कार्यालय का दरवाजा समाज के सबसे अंतिम और आम आदमी के लिए हमेशा खुला रहता और उनसे मिलने के लिए किसी को भी लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। कलेक्टर के रूप में उनकी पहली पदस्थापना सिवनी जिले में हुई, जहां उन्होंने सुशासन के ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए जिन्हें आज भी सिवनी के नागरिक याद करते हैं। वर्ष 2015 में जब वे एक दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल में पहुंचे, तो वहां आर्थिक तंगी के कारण कई अव्यवस्थाएं थीं। उन्होंने तुरंत सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देते हुए एक चैरिटी शो का आयोजन करवाया और सामूहिक सहयोग से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की राशि जुटाई, जिसने उन दिव्यांग बच्चों का जीवन संवार दिया।
यही नहीं, मीडिया की एक खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्होंने सड़कों पर लावारिस घूम रहे मानसिक रूप से दिव्यांग जनों के लिए एक विशेष 'पुनर्वास योजना' बनाई। उन्हें बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर भेजा गया, जिसके सुखद परिणाम स्वरूप दो मानसिक दिव्यांग पूरी तरह स्वस्थ होकर आज अपने परिवारों के साथ सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। उस दौर में जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'फेसबुक' नया और लोकप्रिय हो रहा था, तब वे खुद इस पर सक्रिय रहते थे। लोग फेसबुक मैसेंजर पर उन्हें अपनी समस्याएं भेजते थे, जिस पर वे तुरंत संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजते और समस्या के समाधान की तस्वीर भी साझा करवाते थे।
भरत यादव की दूसरी पदस्थापना बालाघाट कलेक्टर के रूप में रही, जहां उन्होंने 151 दिव्यांग जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराकर एक अनोखा रिकॉर्ड स्थापित किया। वे जिले के उन अत्यंत दुर्गम और सुदूर गांवों का दौरा करने खुद पहुंच जाते थे, जहां आजादी के बाद से अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी कदम नहीं रख पाया था। मुरैना जिले के कार्यकाल के दौरान वे नियमित रूप से स्कूल-कॉलेजों में जाकर युवाओं से संवाद करते थे और उन्हें करियर के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने भारतीय सेना (आर्मी) में शामिल होने की तैयारी कर रहे स्थानीय युवाओं के लिए विशेष लाइब्रेरी खुलवाई और शारीरिक प्रशिक्षण के लिए आवश्यक खेल संसाधन भी उपलब्ध कराए। ग्वालियर में भी कलेक्टर के रूप में उनके जनहितैषी कार्यों की एक लंबी फेहरिस्त रही।
वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान जब संकट गहरा रहा था, तब जबलपुर कलेक्टर के रूप में उन्होंने देश के सबसे लंबे नेशनल हाईवे से जुड़े इस जिले में बेहद सक्रिय लॉकडाउन उपाय और सख्त एसओपी लागू करवाया। इस 'जबलपुर मॉडल' को बाद में राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया गया। उन्होंने कोरोना की पहली लहर के दौरान जनसहयोग के माध्यम से एक लाख से अधिक जरूरतमंद लोगों को सूखा राशन बांटने का अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाया, जिसके चलते जबलपुर जिला राष्ट्रीय स्तर पर 5वें और मध्य प्रदेश में पहले स्थान पर आंका गया। इसी दौर में जब वे नरसिंहपुर के कलेक्टर थे, तो उन्होंने संवेदनशीलता की एक बड़ी मिसाल पेश की। जब आम तौर पर अधिकारी सीधे संपर्क से बच रहे थे, तब भरत यादव खुद को खतरे में डालते हुए पीपीई किट पहनकर सीधे जिला चिकित्सालय के कोविड वार्डों में पहुंच गए। वहां उन्होंने संक्रमित मरीजों का हालचाल जाना और अग्रिम पंक्ति में लड़ रहे मेडिकल स्टाफ का हौसला बढ़ाया।
कलेक्ट्रेट के दायित्वों के बाद भरत यादव ने प्रबंध संचालक (ऊर्जा विकास निगम), आयुक्त (म.प्र. गृह निर्माण मंडल) और आयुक्त (नगरीय प्रशासन विभाग) जैसे महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय पदों का निर्वहन किया, साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के सचिव पद की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से संभाली। गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त रहते हुए उन्होंने सरकारी जमीनों के बेहतर उपयोग के लिए पुनर्घनत्वीकरण की नीति लागू की। आज यह योजना देश भर में लोकप्रिय है, जिसके माध्यम से बिना सरकारी खजाने से एक भी पैसा खर्च किए प्रदेश के सैकड़ों जर्जर सरकारी कार्यालयों की सूरत बदल दी गई। जब वे नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त थे, तब उनके कुशल मार्गदर्शन में 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2023' में मध्य प्रदेश को देश के दूसरे सबसे स्वच्छ राज्य का पुरस्कार मिला, और इंदौर शहर ने लगातार 7वीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव हासिल किया। इसके साथ ही पीएम स्वनिधि और पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन में भी मध्य प्रदेश देश में नंबर वन रैंक पर रहा। इसी विभाग में सेवा के दौरान एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अनुशासनहीनता पर जब मातहत अधिकारियों ने उसे नौकरी से बर्खास्त करने की अनुशंसा की, तब मामला आयुक्त भरत यादव के पास पहुंचा। उन्होंने फाइल पर एक बेहद संवेदनशील टिप्पणी लिखते हुए उस गरीब कर्मचारी की नौकरी बचा ली, हालांकि अनुशासन बनाए रखने के लिए उसका स्थानांतरण कर नियमानुसार सजा भी दी।
वर्तमान में भरत यादव मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक के रूप में तकनीक, आधुनिकता, पर्यावरण संरक्षण फ्रेंडली निर्माण, पारदर्शिता के लिए अभूतपूर्व कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सड़क निर्माण, परियोजना योजना और यातायात प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और ड्रोन सर्वे जैसी उन्नत तकनीकों को शामिल किया है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए करीब 2.57 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिनकी सैटेलाइट से जियो-मैपिंग की जा रही है। साथ ही, उन्नत ट्री-shifting तकनीक अपनाकर 85% पुराने पेड़ों को कटने से बचाकर दूसरी जगह सफलतापूर्वक जीवित रखा गया है। जल संरक्षण की दिशा में उनकी सबसे अनूठी पहल सड़क खुदाई से निकले गड्ढों को 521 तालाबों (लोक कल्याण सरोवरों) के रूप में निर्मित किया जा रहा है, जिनकी रीयल-टाइम निगरानी सैटेलाइट और LiDAR तकनीक से की जा रही है। सुरक्षा के मोर्चे पर उन्होंने राज्य राजमार्गों के लिए अत्याधुनिक 'ARS 2.0' दुर्घटना प्रतिक्रिया प्रणाली और जीपीएस-सक्षम एम्बुलेंस सेवाओं की भी शुरुआत की है। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर इंदौर—उज्जैन ग्रीनफील्ड हाइवे, हरिफाटक ब्रिज चौड़ीकरण, इंगोरिया—उन्हेल हाईवे जैसी कई मेगा परियोजनाओं को समय-सीमा में संचालित करवाने का श्रेय भी भरत यादव के नेतृत्व को ही जाता है। इन विकास कार्यों से न केवल श्रद्धालुओं का सफर आसान होगा, बल्कि ग्रामीण किसानों की मुख्य मंडियों में आसान पहुंच और बड़े शहरों से संपर्क के साथ किसानों की आय बढ़ाने के रास्ते भी यहीं से होकर गुजरेंगे। परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण, प्रशासनिक दृढ़ता, मानवीय संवेदनशीलता और सुशासन के अनूठे संगम वाले जन-जन के इस लोकप्रिय जनसेवक को जन्मदिन की आत्मीय बधाई और असीम शुभकामनाएं।

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