Monday, March 28, 2011

सात बहनों को बड़ी दिक्कत से मिला भाई


  सड़क पर पड़ी प्रसूता महिला
  रायसेन जिले के बाढ़ेर गांव में 7 बहनों को एक भाई मिला। माजरा यह है कि गांव की काशीबाई की उम्र 32 साल है, पहले ही उनकी 7 बेटियां हैं 27 मार्च को इन 7 बहनों को एक भाई भी मिल गया, लेकिन बड़ी कठिनाई से। विदिशा से पास होने के कारण काशीबाई को प्रसव के लिए अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन बच्चे के पैदा होने को जैसे ग्रहण लग गया हो। विदिशा में इतनी सुरक्षा व्यवस्था थी, मानो ऐसा लग रहा था कि कंस का पहरा हो। चारों तरफ पुलिस वाले। काशीबाई की सास, पति आटो से प्रसूता को अस्पताल ले जा रहे थे कि ‘बदनाम’ पुलिस ने आटो रोक दिया। पति, सास ने लाखों मिन्नतें की साहब हमारी बहू को बच्चा होने वाला है, अस्पताल जाने दो। लेकिन पुलिस वालों ने उन्हें अस्पताल नहीं जाने दिया, जबकि पुलिस वाले प्रसूता को तड़पते देख रहे थे। भगवान न करे कि उस वक्त ड्यूटी पर मौजूद पुलिस वालों की बीबी, बेटी, के साथ भी ऐसा हो। क्योकि प्रसव पीड़ा वे पुलिस वाले क्या जानें यह तो एक मां बनने वाली महिला ही जान सकती है। पुलिस वाले चाहते तो आटो को अस्पताल जाने दे सकते थे। अगर उन्हें शहर आ रहे नेताओं की इतनी  ही चिंता थी तो उन्होंने यह क्यों नहीं सोचा कि मुख्यमंत्री खुद चाहते हैं कि हर प्रसव अस्पताल में सुरक्षित रूप से हो। खैर ऐसे पुलिस वालों ने ही पुलिस को बदनाम किया है। यह मामला विधानसभा में भी उठा। इस मामले पर कार्रवाई होना लाजिमी है।
  खबर इस प्रकार है-
विदिशा में प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों ने मात्र 200 मीटर दूर अस्पताल तक नहीं पहुंचने दिया। खुद प्रसूता, उसकी सास व पति पुलिसवालों के सामने खूब गिड़गिड़ाए लेकिन वे नहीं पसीजे। करीब आधा घंटे तक तड़पने के बाद उस महिला की चौराहे पर ही डिलीवरी हो गई। दरअसल, रविवार को विदिशा में अंत्योदय मेले में शिवराजसिंह चौहान, सांसद सुषमा स्वराज, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा सहित दर्जनों नेता शहर में आने वाले थे, इसलिए रास्तों पर कड़ी सुरक्षा की गई थी। पुलिस वाले इनकी सुरक्षा में तैनात थे। उसी समय रायसेन के ग्राम बाढ़ेर निवासी प्रहलाद सिंह अहिरवार अपनी 32 वर्षीय पत्नी काशीबाई को ऑटोरिक्शा से जिला अस्पताल ले जा रहा था। नीमताल चौराहे पर खड़े पुलिस जवानों ने उसे रोक लिया। प्रहलाद व उसकी मां कस्साबाई ने पुलिसवालों को प्रसूता की हालत के बारे में बताया लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

Thursday, March 10, 2011

साक्षात्कार का सच

मप्र लोक सेवा आयोग के दफ्तर के नंबर दो गेट पर मैं
 यह है छोटू जो कि अपनी मम्मी के साथ असिस्टेंट प्रोफेसर का इंटरव्यू देने आया था। नहीं-नहीं आप गलत समझ रहे हैं, इसकी मम्मी इंटरव्यू देने आइं थीं।

इंटरव्यू देकर आफिस से बाहर निकलतीं एक अभ्यार्थी।

 तारीख 7 मार्च दिन सोमवार मैं मप्र की व्यवासयिक राजधानी इंदौर में था। यहां पर ही मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपी- पीएससी) का प्रमुख कार्यालय है। पुरानी बिल्डिंग टूटे गेट, बुजुर्ग सुरक्षा गार्ड हैं। पेड़-पौधे तो बहुत थे, पर गर्मी के मौसम में पतझड़ के कारण पेड़ों से पत्तियों का बेक्रअप हो रहा है। (बे्रकअप= फिल्म लव आजकल के बाद यह शब्द ज्यादा प्रचलित हुआ है, दो प्रेमी-प्रेमिका का जब प्यार से मन भर जाता है तो वह आपसी सहमति से अपना प्यार का रिश्ता तोड़ लेते हैं)। लेकिन यहां पर सबसे अच्छा है वो है इस इमारत की नींव यानी यहां से कई अधिकारी निकले हैं। जो इस बिल्डिंग के अंदर बैठे हैं वे भी उम्रदराज हैं पर उनका ज्ञान तो आपार है कोई भी विषय क्यों न हो, पढ़ाई के दिग्गजों की हवा निकाल देते हैं।

  इसे भी जानिए
  मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग वैसे तो अधिकारियों को पैदा करने की फैक्ट्री मानी जाती है परंतु प्रारंभ से ही यहां पर धांधली के आरोप प्रतिभागी लगाते रहते हैं। ऐसा ही मेरे सामने भी हुआ जब मैं इंदौर स्थित पीएससी के हेड आॅफिस पहुंचा। वहां पर असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू चल रहे थे। कई लोग वहां पहुंचे किसी ने टाई लगाई थी, वहीं कई युवतियां, महिलाएं साड़ी पहनकर आर्इं थीं। कई प्रतिभागियों को जब पता चला कि मैं जर्नलिस्ट हूं तब वे बोले भाई साहब आप ऐसी खबर छापिए जिससे पीएससी वाले लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के नंबर दिखाएं क्योंकि ऐसा न करने से धांधली(सेटिंग) का डर बना रहता है।
उन लोगों को मैंने कहा हां हम प्रयास करेंगे कि ऐसी खबर बनाएं इसके बात कुछ विशेषज्ञों से मेरी बात हुई जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसा करना संभव नहीं है क्योंकि यह एक गोपनीय प्रक्रिया है और भर्ती में कोई घपला नहीं होता।
आप भी जान सकते हैं अपने नंबर
मैं आपको बता दूं कि धांधली का पता लगाना तो संभव नहीं लगता पर आप अपने नंबर जान सकते हैं वो भी सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाकर। जी हां आरटीआई ही ऐसा हथियार है जिससे आप लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के नंबर जान सकते हैं। अगर कोई आरटीआई से जानकारी न दे तो हाईकोर्ट का दरवाजा खुला है। पर हां दूसरों के नंबर नहीं जाने जा सकते, ऐसे में प्रतिभागी अपना आंकलन कैसे कर सकता है। अत: साक्षात्कार का सच जानना आज भी मुश्किल ही है।

Saturday, February 19, 2011

मैच देखो और देखने दो


हालाकि दुनिया में कोई मायने नहीं रखता क्रिकेट, फुटबॉल, ओलंपिक खेलों के बादशाह हैं। मात्र 14 देशों के बीच खेले जा रहे खेल ने भारत को गुलाम बना लिया है। इसके बाद भी क्रिकेट वर्ल्ड कप की धूम मची हुई है। इन सभी के बीच में टीवी के सामने भारतीय लोगों को मुफ्त में ज्ञान बांटने की आदत कुछ ज्यादा ही है। जब विलेन हीरो को मारता है तो जनता मन में सोचती है, हीरो मद्दी है, जब सनी देओल चिल्लाता है तो लोग हवा में उड़ जाते हैं तो सिनेमा में बैठा दर्शक बड़ा  ही खुश होता है।
इन सबसे अलग है क्रिकेट।

भारत और बंगला देश के बीच मैच चल रहा है भारत पहले बेटिंग कर रहा है,
एक भाई साहब बोले- देखा अपना सहवाग कमाल कर रहा है।
दूसरे भाई साहब- मैंने तो पांच ओवर बाद ही बोल दिया था आज सहवाग खूब खेलेगा।
दो लोगों की बात खत्म ही नहीं हुआ तीसरे टपक पड़े- आज तो इंडिया जीत ही जाएगी
लेकिन पहले सचिन को उतारना चाहिए, दूसरा नई यार सहवाग ही कमाल कर देगा।
तीसरा- भैया बेटिंग नहीं बॉलिंग देखी बंगला देश की। उखाड़ कर रख देंगे।
अब रहा नहीं गया तो चौथे भाई भी पास आ गए और हां यार कांफिडेंस देखा गंभीर का तभी तो मस्त खेल रहा है, इतने में ही विकेट गिर गया और गंभीर पिच से गायब
कहीं से आवाज आई यार उसको हल्के से प्लेट करना था, तेजी से खेल गया, इसलिए निपट गया।
 भाई साहब किसी महान पुरुष ने कहा है ‘बगैर मांगे सलाह तो देनी ही नहीं चाहिए।’ और क्रिकेट जिसके बारे में बड़े-बड़े कोच हैं अनुभवी खिलाड़ी। तो काहे को अपनी एनर्जी वेस्ट कर रहे हो......
फालतू की बातें
मैच देखों और देखने दो

Monday, February 7, 2011

बड़े काम की चीज है

 
रोटीवेटर
छोटा हार्वेस्टर
रीपर
छोटा ट्रेक्टर
टपक सिंचाई
प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय
ग्रीन हाउस
भोपाल में कश्मीरी ज्यूस
कंडे भी बिक रहे हैं दाई
संतरे लगाओ खूब कमाओ
सफेद मुसली
शराब पीना जरूरी नहीं है
आलू लगाओं लखपति बनो
आवले के लड्डू

कंडे भी बिक रहे हैं दाई
पशुओ के गोबर को गोल-गोल कर कंडे बनाते तो खूब देखे हैं मैंने पर दादी ने कंडों से सिर्फ खाना ही बनाया था। पर मेले के कंडे तो अद्भुत थे ये बिकने रखे थे, बताया गया कि इन कंडों से आप यज्ञ भी कर सकते हैं। अच्छा है एक बढ़िया व्यवसाय शुरू कर सकते हैं किसान।

भोपाल में कश्मीरी ज्यूस
मेले में घूम-घूमकर मैं थक गया आखिर गर्मी का मौसम जो शुरू हो गया है। तो मैं गया मेले में आए कश्मीर के कृषि विभाग के स्टॉल में जहां पर कश्मीर से लाए गए स्पेशल सेब (एप्पल) से ज्यूस बनाकर दिया जा रहा था। वो भी सिर्फ 10 रुपए में क्या बात इतना सस्ता। मैंने भी एक गिलास पीने की ठानी और गटक गया। पता नहीं कश्मीर जाने को कब मिले कम से कम ज्यूस ता पी लिया मैंने।

प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय
मध्यप्रदेश में दो कृषि विश्वविद्यालय हैं एक महाकौशल जबलपुर में और दूसरा ग्वालियर में। जबलपुर में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय नाम दिया गया है। आपको बता दें 2 साल पहले ही ग्वालियर में कृषि विवि की शुरूआत हुई है। ये दो यूनिवर्सिटी अच्छे कृषि वैज्ञानिक तैयार कर रही हैं। पर खेद की बात यह है कि अधिकतर छात्र मैथ्स-बायो लेकर इंजीनियरिंग मेडिकल में कैरियर बनाना चाहते हैं पर कृषि में उज्जवल भविष्य उन्हें दिखाई नहीं देता। इसका बड़ा उदाहरण है कि कई वैज्ञानिक संस्थानों में कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों की कमी है। उन्हें अच्छे प्रतिभागी नहीं मिल रहे हैं।

रीपर
यह भी बड़ी काम की छोटी मशीन है आप अपनी टू व्हीलर बाईक में टांगकर एक गावं से दूसरे शहर तक जा सकते हैं। इसका काम भी फसल काटने का है। कीमत सिर्फ 80-90 हजार रुपए। इससे कटाई तो होती है पर फसल गट्ठे बन जाती है। इसके बाद गहाई (फसल से दाने निकालना) अलग से करवानी पड़ती है। इसका उपयोग लोगों ने व्यवसाय के रूप में भी किया है। 400 से 500 रुपए घंटे लेकर लोग दूसरे के खेतों की फसल काटते हैं इससे उन्हें अच्छी आमदनी मिल जाती है।

सफेद मुसली
सफेद मुसली यानी किसानों को करोड़पति बनाने वाली फसल। सफेद मुसली का उपयोग दवाई बनाने में होता है भारत में तो कम पर विदेशों में इसकी कीमत बहुत अधिक है। सफेद मुसली से सेक्स बढ़ाने संबंधी दवाएं बनाई जाती हैं। मध्यप्रदेश में मुसली का अच्छा बाजार न होने से बहुत कम ही लोग लगाते हैं। लेकिन आपको बता दें एक एकड़ में आप 1 लाख रुपए लगाकर 4 लाख रुपए तक कमा सकते हैं। तो क्यों ने इसकी खेती की जाए। वर्तमान में सबसे ज्यादा फायदा देने वाली फसल है सफेद मुसली।


संतरे लगाओ खूब कमाओ

अगर आपके पास पानी की कमी है और आप अधिक से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आप संतरे की खेती कीजिए। टपक सिस्टम से सिंचाई करने के बाद संतरे का उत्पादन मध्यप्रदेश के कई जिलों में किसान कर रहे हैं।

टपक सिंचाई
वर्तमान समय में पानी का कम होना, जलस्तर गिरना बड़ी समस्याएं हैं। ऐसे में खेतों की सिंचाई करना एक बड़ी समस्या बनेगी इसलिए अभी सचेत होना जरूरी है। इस समस्या से बचाने हमारे वैज्ञानिकों ने तैयार किया ‘टपक सिंचाई सिस्टम’ इसके द्वारा पानी टपक-टपक के खेतों में गिरता है। खास बात यह है कि इससे पानी की बचत होती है और फसल की जड़ तक पानी जाता है। इस सिस्टम का उपयोग सब्जी, संतरे व अन्य फल वाले बड़े पेड़ों के लिए उपयुक्त होता है। गेहूं, सोयाबीन के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। कम लागत, कम पानी में ज्यादा फायदा देने वाला यह सिस्टम  छिंदवाड़ा, बैतूल आदि जिलों के खेतों में आप देख सकते हैं।

आलू लगाओं लखपति बनो
मम्मी लेज की चिप्स खाने हैं , नहीं मुझे तो बिंगो ही चाहिए। जी हां अकसर छोटे बच्चे यही कहते देखे जाते हैं। 10 चिप्स की कीमत 5 रुपए होती हैं। चिप्स बनते हैं आलू से बस ज्यादा कमाने की ललक हो तो कोई भी ईमानदारी से अमीर बन सकता है। बड़ी-बड़ी कंपनियां किसानों से आलू खरीदती हैं जिससे चिप्स बनाए जाते हैं। मुरैना के किसान उन किसानों से अलग है, जो सोयाबीन गेहूं की फसल लगाकर हमेशा खेती-बाड़ी को कोसते हैं। इस किसान ने आलू की खेती की और उत्पादन हुआ तो 1 किलो तक के आलू का उत्पादन किया। अब वह कम ही समय में लखपति बन गया है। किसान और व्यापारी भी आलू की खेती करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

आवले के लड्डू
सबसे ज्यादा विटामिन सी का स्रोत आंवला भी प्रदर्शनी में आया था। प्रदर्शनी में किसानों का आंवले के लड्डू, मिठाईयां देखने को मिलीं। स्टॉल वालों ने बताया कि आप अपने खेतों में आंवला की खेती करें और इस आवला को कंपनियों को बेंचे और अधिक मुनाफा कमाएं। अगर किसान उद्यमी है तो वह खुद की प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकता है और आंवले से उत्पाद बना सकता है।

शराब पीना जरूरी नहीं है
रतलाम के एक किसान ने पहले तो अंगूरों की खेती की, पर जब उसे ज्यादा कमाने की सूझी तो उसने अंगूर से शराब (वाईन) बनाने की ठान ली। और लगा लिया प्लांट। इस फोटो को देखिए इसकी कीमत 150 रुपए तक है। वाईन बनाने वाला किसान जल्द ही अच्छे रुपए कमाने लगा है।

छोटा हार्वेस्टर
आजकल मजदूरों की कमी है ,इसलिए फसलों की कटाई के लिए मशीन ईजाद की गई है, यह ऐसी मशीन है जिससे फसल कटाई, गहाई सब एक साथ जल्दी-जल्दी हो जाती है। और हमें घर में सीधा दाना मिलता है। लेकिन बड़े हार्वेस्टर 15 से 20 लाख रुपए के आते हैं एक मध्यमवर्गीय किसान के लिए उसे लेना संभव नहीं होता, इसलिए हमारे वैज्ञानिको ने छोटा हार्वेस्टर ईजाद कर दिया। इसे हर किसान खरीद सकता है। इसकी कीमत 2 से 3 लाख रुपए तक है। इसे रखने के लिए एक बाईक बराबर जगह की जरूरत होगी।

छोटा ट्रेक्टर
बड़े-बड़े टेÑक्टर तो आपने बहुत देखे होंगे पर यह छोटा ट्रेक्टर मस्त चीज है। अपनी स्वयं की खेती करने के लिए यह अच्छा यंत्र है। आप इससे अपनी खेती आराम से कर सकते हैं। पर इसकी कमी मुझे देखने को मिली आप इसका व्यवसायिक उपयोग नहीं कर सकते। इसके टायर भी छोटे-छोटे हैं जो गीली मिट्टी में फंस सकते हैं और ज्यादा लोड नहीं लेगा। टायर भी जल्द खराब हो सकते हैं। हां लेकिन इतनी सस्ती कीमत में और क्या मिलेगा। इसकी कीमत 2 से 3 लाख रुपए तक बताई गई है।

ग्रीन हाउस
ग्रीन हाउस क्या है और इसका क्या उपयोग है? यह प्रश्न कक्षा पांचवी में मैंने पढ़ा था बड़ा ही आईएमपी यानी परीक्षा में पूछा जाने वाला महत्वपूर्ण प्रश्न हर साल परीक्षा में आता था पर कभी प्रेक्टिकल नहीं बताया गया हमें बनता ही नहीं था। लेकिन मेले में यह बड़ा मॉडल देखने को मिला। ग्रीन हाउस वह घर है जिसके अंदर सूर्य की किरणें प्रवेश तो करती हैं पर घर से बाहर नहीं निकल पातीं। जब किसी क्षेत्र में आत्याधिक ठंड पड़ती है तो वहां खेतों में ऐेसे घर बना दिए जाते हैं जिसमें एक विशेष प्रकार की पॉलीथिन की छत बना दी जाती है। वहां से सूर्य की किरण प्रवेश करती हैं और अंदर की फसल को गर्म   बनाए रखती हैं। जिससे फसल को ठंड से नुकसान नहीं पहुंचता।

रोटीवेटर
इस यंत्र का काम है मिट्टी को पलटना यानी जब किसान हार्वेस्टर या मजदूरों द्वारा फसल को कटवाया जाता है तो नीचे की फसल का भाग बच जाता है, इसे साफ के लिए किसान खेतों में आग लगाता है जिससे कई नुकसान होते हैं जैसे- पर्यावरण प्रदूषण, दूसरे की फसलों में आग लग जाना, जंगलों में आग लगना, किसी का घर जल जाना, और सबसे बड़ी हानि स्वयं किसान को ही होती है। इससे मिट्टी का उपजाऊपन कम होता है। हां रोटीवेटर से यह सब नहीं होता इसे ट्रेक्टर में फंसाकर चलाने से खेत का कचरा मिट्टी के नीचे चला जाता है और एक साल बाद दबे-दबे खाद में बदल जाता है इससे खेत की उर्वरा क्षमता भी बढ़ती है।
   
 

मृदा परीक्षण केंद्र
जिस प्रकार हम दवाई खाने के पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखते हैं, डॉक्टर से मिलने से पहले उसकी विशेषज्ञता जांचते हैं उसी प्रकार फसल बोने से पहले मिट्टी का परीक्षण जरूरी होता है। कौन सी मिट्टी में कौन सी फसल अधिक उत्पादन देगी, मिट्टी अम्लीय (एसिडिक) है या क्षारीय (बेसिक) या फिर उदासीन है, यह मृदा परीक्षण के बाद ही पता चलता है। आपका बता दूं भोपाल के गौतम नगर स्थित सरकारी लैब है यहां पर आप अपने खेत की मिट्टी नि:शुल्क चैक करवा सकते हैं। जबलपुर, ग्वालियर, सीहोर, इंदौर, आदि जगह भी यह टेस्ट होते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने कृषि विकास अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं।




नोट- अधिक जानकारी के लिए निकटतम कृषि विभाग के कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं। या फिर मेरे मेल पर संपर्क कर सकते हैं।

Friday, February 4, 2011

भैया सरकारी काम ऐसो ही होत है

-deepak rai 
sub editor and farmer bhoapl
  मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा कृषि मेला है ‘फार्मटेक-2011’ राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राऊंड में विशाल टेंट के अंदर लगे इस मेले में देश-भर से वैज्ञानिक, एनजीओ, संस्थाएं और कई स्टॉल आए हैं। लेकिन खेद किसान ही ’नहीं’ आए।
  यह सरकार की बड़ी असफलता ही कही जाएगी कि वह किसानों को यहां तक लाने में असमर्थ रही।
मेरा विश्लेषण-
क्यों नहीं आए किसान(किसानों से साक्षात्कार पर आधारित)
1. वर्तमान समय में किसानों की फसलों में पानी सिंचाई चल रही है वे इतना महत्वपूर्ण कार्य छोड़कर मेले में कैसे आ सकते हैं।
2. प्रदेश के कई शहर इतनी दूर हैं कि आने-जाने कि दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
3. मेला का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया।
4. किसानों का शासन-सरकार के प्रति निराशा होना।
5. किसानों का सोचना है कि जब पटवारी से प्रमाण पत्र बनवाने में पैसे लगते हैं तो पता नहीं मेले में कितनी लूट मचती होगी।
6. पैसों की दिक्कत, अधिकतर किसान गरीब हैं।





मेला-वेला छोड़ो यार चलों नींद ले लें।

सोलर एनर्जी (सौर उर्जा) से चलने वाला यह पंप वाकई काम की चीज है।


कश्मीर का कृषि विभाग ने भी अपना स्टॉल यहां लगाया है।

मस्त छोटा सा हार्वेस्टर, देखने पर मजा आ गया।


प्रमुख गेट।

कुछ झलकियां घटना स्थल से


3 फरवरी घटना करीब 3 बजे की है
मैं लाल परेड ग्राउंड में प्रवेश कर ही रहा था कि सामने से किसाना चले आ रहे थे, चिल्लाते हुए ‘अरे यार कहन भर के पटेल हैं गंदी गाली.... खाना के पेकट लेन नाने कैसो घुसो बेटा , अपन खे तो मिलोई नई ’ दूसरा किसान ‘तू ही तो मरो जात तो खाना के नाने मैं तो पहलेई कहततो नई लगें लाईन में, देख लओं खान नाने भी नई मिलो और धक्का खाओ वो अलग’
तीसरा साथी
‘अरे रहन दे रे रमेश होटल चलिएं नाश्ता-माश्ता खा लेत हैं’
इतने में एक आदमी की आवाज आई
चलो विदिशा सिहोर की बस चली
इतना सुनते ही भूखे किसान बोल
‘नाश्ता-फास्ता छोड़ो रे घर चलिएं कहां बेकार में फंस गए हीयां’
एक बस सामने आई और वे लोग उसमें बैठ गए।
3.30 बजे
मैं अंदर गया तो सामने ही मारुति वाले की कार जो कई शहरों के शो रूम से उठ गई है हां हां मारुति 800 खड़ी हुई थी। कंपनी उस कार का प्रदर्शन कर रही थी। वहां किसानों की भीड़ देखिए साहब
मैंने पूछा भईया यहां क्या हो रहा है
कई किसान एक साथ बोले पर्ची भर दो पर्ची
एक किसान-‘भईया जा सिलिप भर दो भागन से मारुति मेल जाहे तोम्हे’
मैंने भी सोचा क्यों न भाग्य आजमाया जाए
एजेंट से पर्ची ली और भर दिया, इतने में 4-5 किसान मेरे पास आए ‘भईया पेन दईओ, अरे मेरी स्लिप भी भर दो’ मैंने उनकी कूपन भर दी इतने में एक ने मेरा पेन मांग लिया। एक के बाद एक वह कई स्लिप भरता गया आखिर मुझे ही कहना पड़ा अरे भईया मेहे आफिस जाने है पेन दे दे।
4 बजे
मैं अंदर गया तो कई स्टॉल लगे थे कई सरकारी विभाग के जहां पर ऐसे मॉडल प्रदर्शित थे(बड़े-बड़े टमाटर, अमरूद, अन्य सब्जी आदि) जिन्हें देखकर लगा कि कहां पड़े हैं हम नौकरी में खेती बाड़ी कर कमाया जाए। पर खेद हुआ स्टॉल में जानकारी देने विभाग के विशेषज्ञ नहीं बल्कि लिपिक और चतुर्थ ग्रेड के कर्मचारियों को बैठा दिया गया था। वे ही जानकारी दे रहे थे। कुछ जगह ही अधिकारियों के दर्शन हुए वे भी आयोजन कराने वालों को कोस रहे थे ‘सालों ने पानी की व्यवस्था तक नहीं करी’
इतने में किसानों का एक समूह आपस में बातें करते हुए मेरे पास से गुजरा
 ‘भईया सरकारी काम ऐसोई होत है’
इतने में मैंने मोबाईल देखा तो 4.30 हो गए थे और मैं आॅफिस के लिए लेट हो गया था मैं सरपट वहां से निकल गया।
4 फरवरी दूसरा दिन
समय 2.30 बजे
 तीन तारीख को छूटे प्रदर्शन देखने में फिर प्रदर्शनी में गया तो बिल्कुल सन्नाटा। आवाज सिर्फ विज्ञापनों की जो टेक्टर वाले, हार्वेस्टर वाले।
किसानों की संख्या 100 भी बड़े मुश्किल से रही होगी।
 प्रदेश के सबसे बड़े मेले का यह हश्र क्या होगा खेती का, किसानों का और सरकार के ऐसे आयोजनों का?

Saturday, January 29, 2011

बेईमानों की कविता

  ये बेईमान भी कैसे-कैसे होते हैं।
खुलती है इनकी पोल जब अति करते हैं।
छापा पड़ा घरों में देखिए
सरकारी इंजीनियर करोड़पति होते हैं।
मध्यप्रदेश मे भी खूब बेईमान दिखे यारो
विधुत मंडल के इंजीनियर भी करोड़ों में खेलते हैं।
जब उस सड़क पर दीपक चले तो रो दिए
गड्ढे भी अपनी दुदर्शा पर रोते हैं
हमारे कमजोर पुल भी इंजीनियरों को कोसते हैं।
जिस देश में बहती हो गरीबी
जहां करोड़ों लोग भूखे पेट सोते हैं।
उन हरामियों को तो देखों
करोड़ों रुपए के बंगलों में नींद की गोली लेते हैं।
इन्हें नीद भी आए तो कैसे राय
इनके पैसे तो बैंक में भी सुरक्षित नहीं होते हैं।
गांव में स्कूल भी बनवाना हो तो
रिश्वत लेकर ये इंजीनियर घटिया बिल्डिंग पास कर देते हैं।
20-25 हजार की नौकरी करने वाले नौकर,
तभी तो कार-बंगला और ऐश भी करते हैं।
नेताओं से मिलकर बांटते हैं रिश्वत
रिश्वत मिले तो लूट लें मां की ईज्जत
इनके लिए रिश्ते-नाते भी कहां होते हैं।
अपनी परिवार भला रहे तो सब भला,
बांकी लोग इनके दुश्मन होते हैं।
लोग जिंदगी भर मेहनत कर नहीं बना पाते आशियाना (घर)
क्योंकि ये बेईमान ही सबका पैसा अपने पास रखते हैं।
दौलत की कमी नहीं है मेरी भारत माता है पास,
कोई 100 रुपए को तरसा, तो कोई करोड़ों पर खेलते हैं।
का अड्डा बन गया है देश
वरना राय भी कहां ऐर-गैर लिखते हैं।
-दीपक राय, उपसंपादक भोपाल।
  बेईमानों की खबरें पढ़ने पिछला लेख पढ़े।

अरबपति निकले दो इंजीनियर

  शिवपुरी स्थित रामनिवास शर्मा का निवास, जहां शुक्रवार को (28 जनवरी 2011)छापा मारा गया।




















छापों में अरबों की काली कमाई उजागर
लोकायुक्त पुलिस और आयकर विभाग ने प्रदेश में कई स्थानों पर मारे छापे, बेहिसाब संपत्ति का किया खुलासा
शिवपुरी/भोपाल/ग्वालियर 29 jan
सड़क विकास प्राधिकरण भोपाल के महाप्रबंधक आलोक चतुर्वेदी और उपयंत्री रामनिवास शर्मा के भोपाल, विदिशा, शिवपुरी तथा ग्वालियर स्थित घर तथा दफ्तरों पर लोकायुक्त ग्वालियर की टीम ने छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में अब तक 3.13 करोड़ कीमत की चल-अचल संपत्ति मिली है।
लोकायुक्त पुलिस ने चारों जगह शुक्रवार सुबह एक साथ छापे मारे। भोपाल में आलोक चतुर्वेदी के निरूपम रॉयल पाम कॉलोनी जाटखेड़ी में कार्रवाई हुई। एसपी लोकायुक्त बीपी चन्द्रवंशी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान दो डुप्लेक्स, जाटखेड़ी में ही चार मंजिला गर्ल्स हॉस्टल, मानसरोवर कॉम्पलेक्स, होशंगाबाद रोड में एक दुकान तथा जाटखेड़ी के केसरी गांव में 45 एकड़ जमीन मिली है। इसके अलावा इंडिका कार, मोटरसाइकिल भी मिली है। वहां से मिली कुल संपत्ति 1 करोड़, 94 लाख 70 हजार रुपए कीमत की बताई गई है। श्री चन्द्रवंशी ने बताया कि ग्वालियर के गोविंदपुरी स्थित सपना मेंशन के डुप्लेक्स नंबर चार पर जब लोकायुक्त टीम पहुंची तो पता चला कि यह डुप्लेक्स एक साल पहले ही बिक चुका है। भोपाल स्थित मकान से एसबीआई की एक ब्रांच के लॉकर की चाबी भी मिली है।
श्री चन्द्रवंशी ने बताया कि आलोक चतुर्वेदी चंूकि ग्वालियर के निवासी हैं, इसलिए यहां भी कार्रवाई करना पड़ी।
विदिशा से मिला वाहनों का जखीरा
विदिशा में आलोक चतुर्वेदी के रिश्तेदार उपयंत्री रामनिवास शर्मा के कई ठिकानों पर दबिश देकर वहां से पांच डंपर, बुलेरो कार, एक मारुति वैन, टाटा सफारी, एक जेसीबी मशीन, पानी का टैंकर, दो टैÑक्टर, मैक्स 100 (लोडिंग वाहन ) बरामद हुए हैं।
शिवपुरी में दफ्तर पर छापा : लोकायुक्त पुलिस ने शिवपुरी में उपयंत्री रामनिवास शर्मा के मकान तथा आलोक चतुर्वेदी तथा रामनिवास शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इंफ्रा डेवलपर प्रतिष्ठान पर भी छापा मारा। शिवपुरी में हुई कार्रवाई के दौरान एक मारुति वैन, तीन स्कूटी सहित 1 करोड़ 18 लाख 40 हजार की संपत्ति बरामद होना बताई है।
प्रकरण दर्ज : रामनिवास शर्मा के मकान से इलाहाबाद बैंक, सेन्ट्रल बैंक आॅफ इंडिया, स्टेट बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बडौदा आदि शाखाओं के तमाम बैंक खाते, लाकर आदि मिले हैं और इन लॉकरों को सील किया जा रहा है। रामनिवास शर्मा और आलोक चतुर्वेदी पर प्रथमदृष्टया ही अनुपात हीन सम्पत्ति का पता चला है। इनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। 
  1.5 करोड़ नगद और 6 किलो सोना मिला. 30 jan
1.5 करोड़ मिले नगद
  नोटों की गिनती जारी
ल्ल छह किलो सोना मिला, समदड़िया ग्रुप का भी नाम आया, ढाई दर्जन बैंक खातों का खुलासा
प्रशासनिक प्रतिनिधि, भोपाल
जबलपुर में शंकरलाल केमतानी और उनके सहयोगी समूहों पर आयकर छापों की कार्रवाई में नित नए खुलासे हो रहे हैं। जबलपुर के व्यापार जगत के जाने-माने नाम समदड़िया समूह के निवेश से जानकारी से जुड़े दस्तावेज भी आयकर विभाग के हाथ लगे हैं। इस छापे का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इन सभी समूहों ने ‘आॅन मनी हवाला’ करके आयकर विभाग की आंखों में धूल झोंकी और अनेक प्रोजेक्ट्स में करोड़ों रुपए अलग-अलग नामों से निवेश किए। केमतानी सहित अन्य दोनों समूहों के कर्ता-धर्ताओं से आयकर विभाग को करीब डेढ़ करोड़ रुपए नगद और 6 किलो सोना मिल चुका है।
आयकर विभाग ने शुक्रवार को केमतानी समूह और उनके सहयोगियों शंकर मनचानी और रामचंद्र खटवानी के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर छापे मारे थे। कार्रवाई शनिवार को भी जारी रही, जो रविवार को भी जारी रह सकती है। केमतानी और उनके दोनों सहयोगी समूहों के प्रतिष्ठानों, निवास और साइट आफिस से बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद हो रहे हैं, जिनमें कई दूसरे व्यापारिक समूहों, प्रदेश के कद्दावर नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के निवेश की जानकारी हैं। इनमें कुछ रजिस्टर भी हैं जिनमें फ्लैट, दुकान बेचने की फर्जी इंट्रियां बताई जा रही हैं। सभी 20 ठिकानों पर चल रही कार्रवाई में विभाग को अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपए नगद मिल चुके हैं। नगदी के अलावा केमतानी, मनछानी और खटवानी के परिजनों के निवास और अन्य ठिकानों से अब तक 6 किलो सोने के जेवरात मिल चुके हैं। इसके अलावा ढाई दर्जन से ज्यादा बैंक खातों और करीब एक दर्जन बैंक लॉकरों की जानकारी विभाग को मिल चुकी है।
क्या है आन मनी हवाला
आन मनी हवाला यानी अपने पैसों को किसी और के नाम से निवेश करना। आयकर सूत्रों के मुताबिक इसके जरिए इन समूहों के कर्ताधर्ताओं ने न सिर्फ जबलपुर में बल्कि कटनी, सतना और कान्हा में बड़ी संख्या में प्रापर्टी खरीदी है। अपने पैसों को दूसरे नामों से निवेश किया और रजिस्ट्री अपने और परिजनों के नाम से कराई। इस तरह गड़बड़ियों के सबूत छापों के दौरान आयकर टीमों को मिले हैं।
समदड़िया ग्रुप का 60 प्रतिशत तक निवेश
मुस्कान ग्रुप के प्रोजेक्ट के करीब आधा दर्जन प्रोजेक्ट में समदड़िया ग्रुप की 60 प्रतिशत तक भागीदारी है लेकिन वास्तविक दस्तावेजों में इस भागीदारी को छुपाया गया है। बताया जाता है कि आयकर विभाग ने करीब 6 महीने में जबलपुर में ही मुस्कान ग्रुप के ठिकानों पर सर्वे की कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई में मिले दस्तावेज के आधार पर ही इस बार छापे मारे गए हैं। समदड़िया समूह मुख्यत: ज्वैलरी का काम करता है लेकिन इसके कई दूसरे धंधे भी हैं।
6 करोड़ सरेंडर, केमतानी की मां बीमार
देर रात तक मुस्कान ग्रुप के मालिक शंकर मनचानी ने आयकर विभाग के सामने छह करोड़ रुपए की कर चोरी कबूल करते हुए इतनी राशि सरेंडर कर दी है। कार्रवाई के दौरान केमतानी ग्रुप की कौशल्या केमतानी को सीने में दर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

लॉकर में मिले छह लाख
पीसं, ग्वालियर। मप्र सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक आलोक चतुर्वेदी के भोपाल स्थित एसबीआई के लॉकर से लोकायुक्त टीम को छह लाख नगद मिले हैं, जबकि शिवपुरी का लॉकर खाली मिला है। जांच टीम को भोपाल के गर्ल्स हॉस्टल से शराब की बोतलें बरामद हुई हैं। भोपाल में जांच कर रहे लोकायुक्त निरीक्षक सुरेन्द्र राय शर्मा ने बताया कि शनिवार को एसबीआई की विद्यानगर शाखा में आलोक चतुर्वेदी के लॉकर को बैंक अधिकारियों के सामने खोला गया। लॉकर से सिर्फ 5.95 लाख रुपए नगद मिले हैं। शिवपुरी में रामनिवास शर्मा का लॉकर खाली मिला। जाटखेड़ी स्थित आलोक चतुर्वेदी के आलीशान बंगले में लोहे के पलंग और टेंट हाउस के गद्दे से हैरत है। लोकायुक्त टीम से जुड़े सदस्यों का मानना है कि आलोक चतुर्वेदी के यहां छापामार कार्रवाई की सूचना लीक हुई है।
हालांकि छापों में बरामद दस्तावेजों पर जांच की सुई अटक गई है। 
पीडी अग्रवाल ने किए 9 करोड़ सरेंडर
इंदौर।  आयकर विभाग द्वारा शुक्रवार को पीडी अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रालि के चार स्थानों पर किए गए सर्वे में शनिवार को 9 करोड़ रुपए सरेंडर करवाए गए हैं। इसके अलावा इंदौर और उज्जैन के अफसरों ने टीम ने पिछले दो दिनों में लगभग दर्जनभर स्थानों से 22 करोड़ रुपए से ज्यादा सरेंडर करा लिए हैं। इंदौर में चावला कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रालि ने शुक्रवार को 7 करोड़ रुपए सरेंडर किए थे। वहीं बुरहानपुर और ब्यावरा के गारमेंट, ज्वेलर्स और कृषि उपकरण व्यवसायियों से 2.62 करोड़ रुपए सरेंडर करवाए गए हैं। उधर उज्जैन आयकर विभाग के दल ने लगभग 3.40 करोड़ रुपए सरेंडर करवाए हैं।