Tuesday, July 22, 2025

मध्यप्रदेश में निवेश की वैश्विक रणनीति

 

विदेश दौरे का हासिल : ग्लोबल एप्रोच से परफॉर्म, रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के प्रयास

डॉ. दीपक राय, भोपाल (Mb. 9424950144)

 

Dr. Deepak Rai Journalist Article About CM Dr. Mohan Yadav

“परफॉर्म, रिफॉर्म, ट्रांसफॉर्म” के मूलमंत्र को आधार बनाकर ही कोई राज्य आत्म-निर्भर बन सकता है। उद्योगों की स्थापना और निवेश को बढ़ाकर इस मूलमंत्र को जमीन पर उतारा जा सकता है। इन दिनों मध्यप्रदेश की संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए 'उद्योग एवं रोजगार वर्ष 2025' के तहत 'लोकल से ग्लोबल' प्रयास किये जा रहे हैं। हमें यह समझना चाहिए कि संभावनाएं कितनी भी क्यों न हों? लेकिन जब तक 'आकर्षण' नहीं होगा, कोई यूं की खिंचा नहीं चला आएगा। आकर्षण होने बाद अगर कोई पास आता भी जाता है तो वह ज्यादा समय टिक पाएगा? इसकी गारंटी सुविधाओं और 'ईज ऑफ डूइंग' से तय होती है। यह बातें मैं किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं कह रहा हूं। उपरोक्त सभी बातें एक राज्य से संबंधित हैं, जो कि संभावनाओं और सुविधाओं से युक्त है। मध्यप्रदेश औद्योगिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संभावनाओं वाला प्रदेश है, यह बात किसी से नहीं छिपी नहीं है। लेकिन संभावनाओं के प्रसार का जो कार्य पिछले डेढ़ वर्ष में होते दिख रहा है, वह चौंकाता है। सिर्फ अफसरों के भरोसे रहने वाली'निवेश की रणनीति' में बदलाव हुआ है। अब नए किरदार के रूप में राज्य के मुखिया भागीरथी प्रयास करते दिख रहे हैं। एक वर्ष 7 महीने के छोटे से कार्यकाल में सीएम डॉ. मोहन यादव तीन बार में 5 देशों की यात्रा कर चुके हैं। यह यात्रा निवेशकों को आकर्षित करने, प्रदेश को वैश्विक व्यापार के केंद्र के रूप में स्थापित करने और राज्य में रोजगार सृजन की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। हाल ही में दुबई और स्पेन में निवेशकों से संवाद करके भोपाल लौटे सीएम आशाओं से भरे और उत्साह युक्त दिखाई दिए। राज्य में उद्योग विस्तार और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सीएम की विदेश यात्रा क्यों जरूरी है? इसका जवाब भी जानना होगा। एक बेहतर प्रशासक की पहचान यह है कि वह ‘कुंए का मेंढक़’ बनकर न रहे। एक अच्छे प्रशासक को, देश-दुनिया में क्या चल रहा है? इसका प्रथम दृष्ट्या जमीनी अनुभव होना चाहिए। सीएम डॉ. मोहन यादव उन देशों के तौर-तरीके, वहां की संभावनाएं, उन देशों से नवाचार सीखकर आ रहे हैं। इतिहास गवाह है- दुनिया की तरक्की, एक दूसरे देशों की अच्छी बातों और नवाचारों को ग्रहण करने के कारण हुई है। हमें यह जान लेना चाहिए कि अमेरिका, जर्मनी, दुबई, जापान और स्पेन ही क्यों न हो? सभी के विकास का मूल आधार वहां के उद्योग-धंधे ही हैं। यू.के. और जर्मनी नगर-नियोजन, सभ्यता, औद्योगिक तरक्की और ट्रैफिक व्यवस्था मध्यप्रदेश में अपनाने योग्य है। आने वाले समय में यह मध्यप्रदेश में भी अपनाए जा सकते हैं। मेरी सलाह है कि ‘सरकारों को लगातार इस तरह देश और विदेशों के विकसित इलाकों का दौरा करते रहना चाहिए, क्योंकि सुनने की बजाए ‘यात्रा करके' लिया गया अनुभव ज्यादा असरकारक होता है।




निवेश यात्राओं से इन्वेस्टमेंट की राह तो खुलेंगी ही, प्रदेश के विकास के लिए नई दृष्टि मिल सकेगी। प्रदेश के विकास के लिए यह यात्रा आगे उपयोगी सिद्ध होगी ही, साथ ही साथ 'विकसित भारत @2047' के निर्माण में मध्यप्रदेश की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मध्यप्रदेश की संभावनाओं को समझने के लिए यह दो बयान बहुत महत्वपूर्ण है। सीएम के तत्कालीन यू.के. दौरा के दौरान ब्रिटिश सांसद लॉर्ड रमिन्दर रेंजर ने कहा था- ''यूरोप और यूएसए की ग्रोथ की अपेक्षा भारत में 8 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ मौजूद है। भारत में इन्वेस्ट किया गया धन सेफ है।'' एक अन्य सांसद लॉर्ड कुलवीर रेंजर की बात भी गौर फरमाइए- ''मध्यप्रदेश उभरता हुआ राज्य है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों के साथ की वन-ऑन-वन मीटिंग्स के सकारात्मक परिणाम आएंगे।'' तीन बार में पांच देशों की यात्राओं से मध्यप्रदेश को क्या हासिल हुआ है? यह जानना भी जरूरी है।

पहली यात्रा: 24 से 30 नवंबर 2024 तक यूके और जर्मनी का दौरा किया। वहां से लगभग 78 हजार करोड़ के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए। जर्मनी के मात्र डेढ़ दिन के प्रवास में 18 हजार करोड़ के निवेश के प्रस्ताव मिल गए। कई प्रस्तावों पर कार्य आगे बढ़ चुके हैं।

दूसरी यात्रा : 27 जनवरी से 31 जनवरी 2024 तक जापान की निवेश यात्रा की। ऑटोमोबाइल, कपास उत्पादन, रेडीमेड गारमेंट से निवेश के प्रस्ताव मिले। जापान के सबसे अमीर उद्योगपति ने मध्यप्रदेश में निवेश पर रुचि दिखाई।

तीसरी यात्रा : अब मुख्यमंत्री 20 जुलाई 2025 को भोपाल पहुंचे हैं। 13 से 19 जुलाई तक दुबई और स्पेन में शीर्ष व्यापारिक प्रतिनिधियों से मिले। यहां से 11 हजार 119 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। जिससे 14 हजार से अधिक व्यक्तियों को रोजगार भी मिलने की उम्मीद है।

विदेश यात्राओं के अलावा देश में आरआईसी, इंटरएक्टिव सेशन, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे भव्य आयोजन हुए हैं, जिनके जरिये राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार होता दिख रहा है। लेकिन क्या मध्यप्रदेश निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और भरोसेमंद राज्य है? यह निवेशकों के लिए कितना अनुकूल है? आखिर यहां निवेशक उद्योग धंधे क्यों लगाने आएंगे? इसके जवाब में हमें पता चलता है- एमपी में 18 नई औद्योगिक नीतियां लांच की गई हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, जनविश्वास अधिनियम, सिंगल विंडो सिस्टम, पर्याप्त लैंड बैंक, हाथों-हाथ अनुमतियां, पानी और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता, उद्योगपतियों को सब्सिडी (वर्ष 2024-25 में 5260 करोड़ रुपये), छोटे निवेशकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन की सुविधा। कुशल मानव श्रम, सड़क-हवाई-रेलवे मार्ग से पूरे देश से आसान कनेक्टिविटी, पर्यटन, फार्मा, माइनिंग, कृषि, डेयरी, नवकरणीय ऊर्जा, कम संचालन लागत, प्रशिक्षित युवा प्रतिभा की उपलब्धता वैश्विक निवेशकों की पसंद बन सकते हैं। तमिलनाडु के कोयंबटूर और गुजरात के अहमदाबाद में उद्योग कार्यालय प्रारंभ करने के लिए सरकार ने नवाचार प्रदर्शित किया है।

ऐसे में, सीएम डॉ. मोहन यादव के द्वारा निवेश के लिए की जाने वाली यात्राएं न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यात्राओं से वैश्विक मंच पर राज्य की विकास योजनाओं और संभावनाओं को प्रस्तुत किया जाता है। खुद राज्य के मुखिया का अन्य देशों में निवेश की संभावनाओं को तलाशने पहुंच जाना, यह विजन और डेडिकेशन नहीं तो और क्या है? मुख्यमंत्री की सक्रियता और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण ने न केवल राज्य में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी छवि को मजबूत किया है। यह यात्रा मध्य प्रदेश को वैश्विक निवेश के नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

The achievement of foreign tour: How effective are the efforts for investment possibilities

 

CM Dr. Mohan Yadav Foreign Visit Special

Perform, Reform, Transform with Global Approach

Dr. Deepak Rai, Bhopal (Mob. 9424950144)


Only by making the basic mantra of “Perform, Reform, Transform” a basis can a state become self-reliant. This basic mantra can be put on the ground by setting up industries and increasing investment. These days, efforts are being made from 'local to global' under 'Industry and Employment Year 2025' to take the possibilities of Madhya Pradesh to the global level. We should understand that no matter how many possibilities there are? But unless there is 'attraction', no one will come just like that. Even if someone comes near after attraction, will he be able to stay for a long time? Its guarantee is decided by facilities and 'ease of doing'. I am not saying these things for any particular person. All the above things are related to a state, which is full of possibilities and facilities. It is not hidden from anyone that Madhya Pradesh is a state with industrial, cultural and tourism potential. But the work that has been done to expand these possibilities in the last one and a half years is surprising. There has been a change in the 'investment strategy' which was dependent only on officers. Now, as a new character, the head of the state is seen making Bhagirathi efforts. In a short tenure of one year and seven months, CM Dr. Mohan Yadav has visited 5 countries in three times. This trip has been done with the aim of attracting investors, establishing the state as a center of global trade and increasing the possibilities of employment generation in the state. The CM, who recently returned to Bhopal after interacting with investors in Dubai and Spain, appeared full of hope and enthusiasm. Why is the foreign trip of the CM necessary for industrial expansion and attracting investors in the state? The answer to this also needs to be known. The identity of a good administrator is that he does not remain a 'frog in the well'. A good administrator should have first-hand experience of what is going on in the country and the world. CM Dr. Mohan Yadav is coming back after learning the ways of those countries, their possibilities, innovations from those countries. History is witness that the world has progressed due to adopting the good things and innovations of each other's countries. We should know that whether it is America, Germany, Dubai, Japan and Spain, the basic foundation of the development of all is their industries. The city planning, civilization, industrial progress and traffic system of UK and Germany are worth adopting in Madhya Pradesh. In the coming time, these can also be adopted in Madhya Pradesh. My advice is that the governments should keep visiting developed areas of the country and abroad, because the experience gained by 'traveling' is more effective than listening.




Investment tours will not only open the way for investment, but will also provide a new vision for the development of the state. This tour will not only prove useful for the development of the state in the future, but is also a proof of Madhya Pradesh's commitment in building a 'Developed India @ 2047'. These two statements are very important to understand the possibilities of Madhya Pradesh. During the then UK visit of the CM, British MP Lord Raminder Ranger had said - "Compared to the growth of Europe and USA, India has a growth rate of more than 8 percent. Money invested in India is safe."

 Also pay attention to the words of another MP Lord Kulveer Ranger - "Madhya Pradesh is an emerging state. CM Dr. Mohan Yadav's one-on-one meetings with investors will yield positive results." What has Madhya Pradesh achieved from the visits to five countries in three times? It is also important to know this.  

First visit: Visited UK and Germany from 24 to 30 November 2024. Investment proposals worth about 78 thousand crores were received from there. Investment proposals worth 18 thousand crores were received in just one and a half days of stay in Germany. Work has progressed on many proposals.

Second visit: Investment visit to Japan from 27 January to 31 January 2024. Investment proposals were received from automobile, cotton production, readymade garments. Japan's richest industrialist showed interest in investing in Madhya Pradesh.

Third visit: Now the Chief Minister has reached Bhopal on 20 July 2025. Met top business representatives in Dubai and Spain from 13 to 19 July. Here too, investment proposals worth thousands of crores of rupees have been received.



Apart from foreign trips, grand events like RIC, interactive sessions, Global Investors Summit have been organized in the country, through which a favorable environment for investment in the state seems to be being created. But is Madhya Pradesh a transparent and trustworthy state for investors? How favorable is it for investors? Why will investors come here to set up business? In answer to this, we come to know - 18 new industrial policies have been launched in MP. Ease of doing business, Jan Vishwas Act, single window system, adequate land bank, instant permissions, adequate availability of water and electricity, subsidy to industrialists (Rs 5260 crore in the year 2024-25), facility of additional incentives to small investors. Skilled human labor, easy connectivity with the whole country by road-air-rail, tourism, pharma, mining, agriculture, dairy, renewable energy, low operating cost, availability of trained young talent can become the choice of global investors. The government has shown innovation to start industry offices in Coimbatore, Tamil Nadu and Ahmedabad, Gujarat. In such a situation, the trips undertaken by CM Dr. Mohan Yadav for investment can prove to be important not only for Madhya Pradesh but for the entire country. The trips present the development plans and possibilities of the state on the global platform. If the head of the state himself goes to other countries to explore investment possibilities, then what is it if not vision and dedication? The Chief Minister's activism and development-oriented approach has strengthened his image not only in the state but also at the national level. This trip can prove to be an important step towards establishing Madhya Pradesh more strongly on the global investment map.

Wednesday, June 4, 2025

मध्यप्रदेश में क्यों है अहिल्याबाई होल्कर का महत्व

देवी अहिल्याबाई के पथ पर मोहन सरकार

18वीं सदी की रानी की याद में 09 महीने तक मनाया जा रहा जश्न

डॉ. दीपक राय, डेली मीडिया गैलरी, 30 मई 2025 भोपाल। 

Devi Ahilya bai Holkar and information Dr. Deepak Rai
मध्यप्रदेश में इन दिनों नया माहौल देखने को मिल रहा है। यह जितना राजनीतिक दिखता है, उससे कहीं अधिक यह सामाजिक और सांस्कृतिक है। 18वीं सदी की मराठा रानी देवी अहिल्याबाई होल्कर की याद में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार व्यापक आयोजन कर रही है। अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर 31 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में 'महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन' को संबोधित करने आ रहे हैं। महासम्मेलन में दो लाख से अधिक महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्य, लाडली बहना योजना के लाभार्थी और उद्यमी शामिल होंगी। इसके कई महीनों पहले से ही राज्य में सांस्कृतिक स्मृतियों को संजोने के आयोजन लगातार हो रहे हैं। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रखर चेहरा रहीं देवी अहिल्याबाई के इर्द-गिर्द इस अभियान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी डॉ. मोहन यादव ने ली है। उनकी कहानी को अपनी सरकार के विकास कार्यों और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं से जोड़ा है। मुख्यमंत्री बने हुए एक वर्ष भी नहीं हुए थे और मुख्यमंत्री ने सितंबर 2024 से 9 महीने नौ महीने तक चलने वाले अभियान को प्रारंभ कर दिया था। ऐतिहासिक रूप से पूजनीय अहिल्याबाई को शोध, शैक्षणिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, विकासात्मक आयोजन से मध्य प्रदेश की राजनीति के केंद्र में पहुंचा दिया है। अहिल्याबाई, अपनी प्रशासनिक प्रतिभा के अलावा, कई मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए लिए एक सांस्कृतिक प्रतीक हैं। सुशासन से 


राष्ट्रवाद से सुशासन की झलक भी उनके कार्यकाल में प्रमुख रूप से देखी गई। 9 महीनों के दौरान मध्यप्रदेश के महेश्वर, चित्रकूट, इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और ओरछा जैसे शहरों में अहिल्याबाई पर आाधारित लोक और नृत्य प्रदर्शन, कला प्रदर्शनियाँ, नाट्य नाटक आयोजित किए हैं। शोध गोष्ठियां हुई हैं। उनके जीवन पर एक राज्य प्रायोजित फिल्म और एक स्मारक पुस्तक को मंजूरी दी गई है। नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर उनकी प्रतिमाएँ लगाने की योजना बना रही है।अहिल्या बाई द्वारा पुनर्स्थापित मंदिरों (वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर सहित) की 234 जल रंग चित्रों की प्रदर्शनी और उनके नाम पर एक प्रकाश और ध्वनि शो आयोजित किया। मराठी साहित्य अकादमी अहिल्याबाई से संबंधित दस्तावेजों का अनुवाद कर रही है। कुछ दिनों पहले इंदौर में अहिल्याबाई के सत्ता के केंद्र राजवाड़ा पैलेस में आयोजित कैबिनेट बैठक में सीएम डॉ. यादव ने अभियान से संबंधित 3,876 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी और ऋण पर ब्याज सब्सिडी प्रदान करने के लिए उनके नाम पर एक युवा प्रशिक्षण कार्यक्रम को मंजूरी प्रदान की। महिला स्टार्ट-अप नीति पर काम चल रहा है, जिसमें अहिल्याबाई पर प्रदर्शनियों में महिला कारीगरों और उद्यमियों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। कई राज्यों में भाजपा शासित सरकारें हैं। भाजपा के पास देश में नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन पार्टी ने अहिल्याबाई के इर्द-गिर्द अभियान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी डॉ. मोहन यादव को दी है। यादव ने अहिल्याबाई की कहानी को अपनी सरकार के विकास कार्यों और महिला सशक्तिकरण योजनाओं से जोड़ा है। मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में पहली बार ऐसा हो रहा है, जबकि बड़े पैमाने पर आयोजन हो रहे हैं, खुद प्रधानमंत्री जिसका साक्षी बन रहे हैं। लंबे समय, करीब 17 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को छोड़कर भाजपा—राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन का चयन किया, यह कम आश्चर्यजनक नहीं था। यह संयोग है कि इंदौर, भाजपा के कद्दावर नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का गढ़ है, जिन्हें पहले संभावित मुख्यमंत्री का चेहरा माना जा रहा था। एक समय हिन्दुत्व का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी उमा भारती भी ऐसा कुछ नहीं कर पाईं थीं। सरकारी स्तर पर धार्मिक, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रतीक का उत्सव पहले कभी नहीं देखने को मिला। अब डॉ. मोहन यादव ने अहिल्याबाई के इर्द-गिर्द अभियान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाकर, उन्हें विकास कार्यों और महिला सशक्तिकरण योजनाओं से जोड़ा है। हिंदुत्व के पंथ में अहिल्याबाई के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने वाले पहली बार मुख्यमंत्री बने व्यक्ति के लिए यह आयोजन एक अतिरिक्त बोनस है। महिला सशक्तिकरण का यह अभियान देश में डॉ. मोहन यादव के बढ़ते कद की ओर इशारा करता है। ​हिन्दुत्व, मंदिर पर जितना हमला मुगलों ने बोला, और उन मंदिरों की जिस तरह अहिल्याबाई ने पुनर्स्थापना कराई। खुद मोहन यादव कहते हैं कि मुगलों ने हमारे देवस्थानों को नष्ट करने के लिए अभियान चलाया। अहिल्याबाई होल्कर को छोड़कर बड़े शासकों ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया। सीएम की यह सोच भारत के सांस्कृतिक इतिहास को बनाए रखने के लिए "स्वदेशी" रियासतों की प्रशंसा करने के भाजपा के कथन से जोड़ता है। कुछ लोग कहते हैं कि देवी अहिल्याबाई का इस्तेमाल भाजपा और आरएसएस राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं। लेकिन संघ के कार्यकर्ता अपना पक्ष रखते हुए कहते हैं कि हम देवी अहिल्याबाई के  सामाजिक और धार्मिक योगदान, उनके शासन मॉडल का जश्न मना रहे हैं। समाज को इन सबके बारे में पता चले, इसमें गलत क्या है?भाजपा के एक नेता कहते हैं कि हम डॉ. अंबेडकर, विवेकानंद और 1857 के विद्रोह जैसे राष्ट्रीय नायकों का जश्न मनाते हैं। संघ ने इन सभी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का स्मरण किया है। अब पूरे देश को अहिल्याबाई के सुशासन, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बारे में क्यों नहीं जानना चाहिए? वह सिर्फ इंदौर की रानी नहीं थीं। वह देश के लिए सुशासन का नया मॉडल कई वर्षों पहले ही गढ़कर चली गईं। भाजपा सीधे तौर पर अहिल्याबाई उत्सव को राजनीतिक लाभ कमाने की बात नकार रही है, लेकिन क्या यह मोहन यादव की महिला-केंद्रित शासन व्यवस्था का विस्तार है। आने वादे दिनों में भाजपा शासित सभी राज्यों में ऐसे ही उत्सव देखने को मिल सकते हैं। कई राज्यों में देवी अहिल्याबाई के सुशासन की कहानी का प्रसार हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला आधारित सुशासन को आगे बढ़ा रहे हैं, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता तैयार हो रहा है। आपरेशन सिंदूर में महिला नेतृत्व दिखा है। तो क्या यह कहा जा सकता है कि भोपाल में हो रहे महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन के बाद मुख्यमंत्री और मजबूत होकर उभरेंगे? ऐसा लग रहा है डॉ. मोहन यादव का भाजपा और संघ में विस्तार का रास्ता भी यहीं से निकलेगा। 




स्वावलंबी महिला, सशक्त राष्ट्र और मध्यप्रदेश

विश्लेषण लेख
डॉ. दीपक राय
डेली मीडिया गैलरी भोपाल
31 मई 2025
Article about Devi Ahilya Bai Holkar Dr. Deepak Rai
महिला सशक्तिकरण की शुरुआत महिला सुरक्षा से होती है। शारीरिक सुरक्षा, शैक्षणिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा। इन सभी के संयुक्त होने के बाद ही नारी सशक्त बनती है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में लाखों महिलाओं की उपस्थिति। इसके अलग-अलग मायने निकाले जाने चाहिए। एक तो ये कि केंद्र की कई योजनाओं के संचालन में मप्र अव्वल है। दूसरे कुछ राजनीतिक पक्ष भी हैं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई के नाम पर महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन संभवत: देश का ऐसा पहला आयोजन है, जहां से भाजपा नारी सशक्तिकरण का नया चैप्टर शुरू कर रही है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्यप्रदेश को ही इस विशेष आयोजन के लिए चुना है? इस सवाल का जवाब हमें खोजना चाहिए। मध्यप्रदेश का इतिहास महिलाओं के मामले में समृद्धता से भरा रहा है, यह महिलाओं के शासन की भूमि है, महिला शौर्य की गाथा यहां की मिट्टी में सौंधी खुशबू बिखेरती है। रानी दुर्गावती, रानी अवंतिबाई, रानी कमलापति जैसे दर्जनों नाम हैं, जो प्रमाणित करते हैं कि मध्यप्रदेश नारी सशक्तिकरण का केंद्र रहा है। देवी अहिल्याबाई एक ऐसा नाम है जो मुगलों के आक्रमण के दौरान भी महिला शासन की मजबूत नींव बनी रही। उनके शासनकाल में महिला स्वावलंबन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नया अध्याय लिखा गया। 18वीं सदी के दौर में उनका सुशासन पूरी देश-दुनिया में चर्चित रहा।
वर्तमान मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार महिलाओं के लिए जो प्रयास कर रही है, उसमें देवी अहिल्याबाई के शासन की  झलक पेश करने की कोशिश है। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई बार सार्वजनिक मंचों से कहते रहे हैं कि महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता उनकी प्राथमिकता है। इस दावे की कितनी सच्चाई है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना : मध्यप्रदेश में जन्म लेने वाली बेटी के जन्म के बाद लखपति बन जाती है।  50 लाख 41 हजार 810 से ज्यादा बेटियां  पंजीकृत हैं।
सुपोषण की पहल : मप्र में कुपोषण की दर 60 प्रतिशत से घटकर 33 तक प्रतिशत आ गई है। 97 हजार से अधिक आंगनबाड़ी में 81 लाख बच्चे, महिलाएं, किशोरियां दर्ज हैं।
महिलाओं का बजट : मोहन सरकार ने वर्ष 2024- 25 में महिला एवं बाल विकास विभाग का बजट 26560 करोड़ रुपये स्वीकृत किया है। पिछले वर्ष की तुलना यह 81 प्रतिशत ज्यादा है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ :  छात्रवृत्ति, साइकिल, स्कूटी, 12वीं के बाद शिक्षा हेतु 25 हजार रुपये सहित कई प्रोत्साहन सरकार दे रही है।
शक्ति रूपा : बेटी को सशक्त बनाने के लिए शक्तिशाली बनाना पड़ता है। सशक्त वाहिनी कार्यक्रम से 11 हजार बालिकाओं को कोचिंग आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है।
लाड़ली बहना योजना :  योजना के लिए 18994 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य की 1.25 करोड़ महिलाएं इसका लाभ ले रही हैं।
सरकार हर माह 1250 रुपए की राशि भेज रही है। 1 करोड़ 27 लाख से अधिक बहनों के खातों में सीधे कुल 28 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि अंतरित की जा चुकी है। 
मोहन यादव कहते हैं कि सरकार "भगवान श्रीराम की संस्कृति" में विश्वास करती है, जहां वचन निभाना ही धर्म होता है। यह योजना केवल पैसा देने की व्यवस्था नहीं, बल्कि बहनों - में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और गरिमा की भावना को भी - मजबूत कर रही है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना : इस योजना में गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है, मप्र योजना के संचालन में कई वर्षों से अग्रणी राज्य है।
2024-25 में लगभग 6 लाख 30 हजार 929 हितग्राही महिला पंजीकृत हैं।
पीएम उज्जवला योजना : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना से महिलाओं को धुंआ से मुक्ति मिली है। मप्र में लाखों महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर दिए गए हैं। 26 लाख से अधिक बहनों को गैस रिफिलिंग के लिए 30 करोड़ 83 लाख रुपए की सहायता दी गई है। 
हर घर नल से जल : प्रदेश के हर घर तक नल से पीने का शुद्ध जल पहुंचाया जा रहा है। 
स्व सहायता समूह : स्व सहायता समूह ने प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया है।  उनके द्वारा बनाए गए उत्पाद पूरी दुनिया में ऑनलाइन बिक रहे हैं। महिलाओं में उद्यमिता का गुण विकसित किया जा रहा है।
वन स्टॉप सेंटर : राज्य में 57 वन स्टाप सेंटर हैं जहां पर संकटग्रस्त महिलाओं को काउंसिलिंग, कानूनी सलाह, अस्थायी आश्रय मिल रहा है। 
सशक्त सुरक्षा प्रणाली : महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को इमरजेंसी सेवा 112 से जोड़ा गया है। एक कॉल पर तुरंत मदद मिलती है। एक वर्ष में ही 82552 महिलाओं को इसका लाभ मिला है।
शक्ति सदन : मप्र में 13 जिलों में 14 शक्ति सदन संचालित हैं, जहां पर कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं और बच्चियों को सुरिक्षत आश्रय मिलता है। यह सुविधा सभी संभागों में प्रारंभ होगी।
फांसी की सजा : महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश में आरोपियों को फांसी की सजा का प्रावधान है। 
लखपति दीदी : 
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता बढ़ी है। बीपीएल श्रेणी की लाखों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है, वे लखपति बन चुकी हैं। 
देवी अहिल्याबाई नारी सशक्तिकरण मिशन : महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए एकीकृत प्रयास के तहत यह मिशन शुरू किया गया है। इससे का जीवन बेहतर और आत्मनिर्भर होगा।
लोकल से ग्लोबल : प्रदेश की 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रही हैं। वे लोकल से ग्लोबल तक की यात्रा तय कर रही हैं।
हाइजीन और सैनिटेशन योजना : 19 लाख बालिकाओं को हाइजीन और सैनिटेशन योजना से आर्थिक संबल मिला है। इससे न केवल उनकी स्वच्छता और स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ी है।
सरकारी सेवाओं में आरक्षण : सरकारी सेवाओं में महिलाओं का आरक्षण 33% से बढ़ाकर 35% किया है। शिक्षा विभाग में भी 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। 
नेतृत्व के अधिक अवसर मिलने की दिशा में बड़ा कदम है।
नशामुक्त अभियान : महिला सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों की पवित्रता के लिए 19 स्थलों को पूर्ण नशामुक्त किया गया है।
महिला उद्यम क्रांति : एमएसएमई विकास नीति और ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन देने की नीति  है। वे आधुनिक उद्योगों में भागीदारी कर रही हैं।
मुख्यमंत्री उद्यम शक्ति योजना  से 30 हजार से अधिक एसएचजी को कम बयाज में 648 लाख रुपए का लोन अनुदान दिया है।
स्टार्टअप से सशक्तता : मध्यप्रदेश में वर्ष 2024-25 में महिला स्टार्ट-अप्स की संख्या में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 
संख्या 4012 से बढ़कर 5230 हो गई। "मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं क्रियान्वयन योजना 2025" में सरकार ने महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण बनाया है।
निकायों में महिला आरक्षण : 
निकाय और ग्राम पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण नारी शक्ति को दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना :  प्रदेश में 6 लाख बेटियों का विवाह या निकाह किया गया है। सरकार 55 हजार की राशि  प्रत्येक जोड़े को देती है।
वरिष्ठजन  : बुजुर्ग महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन का प्रावधान है। हर बुजुर्ग को आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज दिया जा रहा है।
इन योजनाओं को देखकर लगता है कि क्या मोहन यादव देवी अहिल्याबाई होल्कर के प्रशासकीय गुणों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
वैसे भी महिला आधारित योजनाओं के कारण, मध्यप्रदेश का महिला सशक्तिकरण मॉडल देशभर में चर्चित है। लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना योजनाओं को अन्य राज्यों ने जस की तस लागू किया है।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 2 लाख महिलाओं की उपस्थिति वाला महासम्मेलन मप्र और सीएम मोहन यादव की राजनीतिक यात्रा की नई दिशा दशा तय करेगा। यह महासम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नारी सशक्तिकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उच्च प्राथमिकता का विषय है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण और ऑपरेशन सिंदूर में महिला नेतृत्व इसका प्रबल उदाहरण है। महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर मोहन यादव देश के अन्य राज्यों से आगे निकलते दिख रहे हैं। अभी तो ऐसा ही दिख रहा है।





Tuesday, May 20, 2025

ओपिनियन : मातृशक्ति के रास्ते सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का सफर तय कर रहे डॉ. मोहन यादव

डॉ.ओपिनियन : मातृशक्ति के रास्ते सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का सफर तय कर रहे डॉ. मोहन यादव

देवी अहिल्या बाई की त्रिशताब्दी पर मध्यप्रदेश में होते आयोजन


डॉ. दीपक राय

डेली मीडिया गैलरी,

भोपाल, 20 मई 2025



दीपक राय, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुछ ऐसा करने के लिए ललायित दिख रहे हैं जो पहले नहीं हुआ। वे उन नायक और नायिकाओं के योगदान को उजागर करने के लिए काम कर रहे हैं, जिन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सिद्धांत को जमीन पर उतारा। खासकर उन महिलाओं के योगदान को सम्मान दिलाने का प्रयास हो रहा है जिन्हें इतिहास ने भुला दिया। अब उन्हें 'उचित स्थान दिलाया जाए' इसके लिए डॉ. मोहन यादव रोडमैप बना रहे हैं और चलना प्रारंभ भी कर दिया है। दरअसल, देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वी जयंती पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए रणनीति बनाई है। विश्वमांगल्य सभा नामक प्रकल्प के जरिये किया जा रहा यह आयोजन संघ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। जिसका आदर्श वाक्य 'संस्कार, सामर्थ्य, सदाचार और सेवा' है। इसमें भारत का गौरवशाली इतिहास रहीं महिलाओं का इतिहास समाज के सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल, संघ मातृ शक्ति तक सीधा संपर्क बनाना चाहता है। यह संगठन महिलाओं को सनातन संस्कारों, सांस्कृतिक मूल्यों और अनदेखे नायकों की कहानी समाज के सामने लाना चाहता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत इस मुद्दे पर काफी गंभीर हैं। वे स्वयं विश्वमांगल्य की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में संघ के समर्पित कार्यकर्ता डॉ. मोहन यादव कैसे पीछे रह सकते हैं? 31 मार्च को विश्वमांगल्य और मध्यप्रदेश सरकार ने खरगोन के महेश्वर में देवी अहिल्या बाई होल्कर पर आधारित भव्य कार्य​क्रम किया। संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, संघ, भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद रहे। डॉ. मोहन यादव, संघ की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की धारा के साथ समर्पित होकर उसी वेग में प्रवाहमान हैं। 


5 अक्टूबर 2024 की तारीख याद कीजिए, जब मध्यप्रदेश की पूरी सरकार दमोह के सिंग्रामपुर पहुंच गई। सिंगौरगढ़ के किला के पास मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। यह क्षेत्र वीरांगना रानी दुर्गावती की राजधानी है। एक और तारीख है, 24 जनवरी 2025, खरगोन जिले के महेश्वर में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। महेश्वर यानि लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की पावन नगरी। सुशासन की राजधानी। न्यायप्रियता, शिक्षा, समाज कल्याण, धर्म कल्याण, जल संरक्षण, महिला स्वावलंबन का आदर्श स्थापित करने वाला नाम है— अहिल्या बाई। आज फिर इंदौर में मंत्रिपरिषद की बैठक हो रही है।  यह केवल श्रृद्धांजलि मात्र का अवसर नहीं है, बल्कि संघ का समर्थन हासिल करने का माध्यम भी है, जो कि डॉ. मोहन को पहले से हासिल है। यह संघ और मप्र सरकार के बीच परस्पर तालमेल की रणनीति की बानगी है। स्पष्ट संकेत है— देवी अहिल्याबाई, रानी दुर्गावती जैसे चरित्रों से वैचारिक जमीन तैयार की जा रही है। हमें यह याद रहना चाहिए कि संघ के सांस्कृतिक एजेंडे में महिलाएं केंद्र में हैं। अब विश्वमांगल्य संगठन द्वारा, संघ की रणनीति में महिला भागीदारी को नई तरीके से परिभाषित किया जा रहा है। संघ का उद्देश्य स्पष्ट है— महिलाएं सिर्फ संरक्षण की पात्र नहीं हैं, वे सांस्कृतिक प्रचार की वाहक भी हैं। यही कारण है कि अहिल्या बाई का नाम सिर्फ इतिहास ही नहीं, मध्यप्रदेश की सत्ता और राजनीतिक सुशासन का प्र​तीक बन गया है। अहिल्या बाई अब एक ऐसा नाम बनकर उभर रहा है जो सत्ता के समीकरण के साथ—साथ नई ​वैचारिक धुरी भी है। मुखिया मोहन यादव अहिल्या बाई के साथ ही रानी दुर्गावती, रानी झलकारी बाई जैसी विभूतियों को जनता के मन और मस्तिष्क में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि यह नाम देश की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रतीक हैं। अब महाराष्ट्र सरकार भी मध्यप्रदेश से प्रेरणा लेकर लोकमाता देवी अहिल्या के जन्म स्थान में कैबिनेट बैठक करना चाहती है।

आपको बता दूं कि अहिल्याबाई होलकर ने वर्ष 1767 से 1795 तक होलकर वंश के शाही परिवार की सत्ता संभाली और मध्यप्रदेश के महेश्वर से अपना शासन चलाया। देवी अहिल्या बाई का शासन सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए सुशासन का प्रतीक है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सुशासन, क्षेत्रीय विकास, न्याय प्रबंधन की जब बात की जाती है तो सबसे पहला नाम देवी अहिल्याबाई का आता है। महिलाओं में स्वावलम्बन की सीख देने वाली अहिल्याबाई ने देश भर में धर्म और संस्कृति के उत्थान के कार्यों के माध्यम से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पताका फहराई। अहिल्याबाई का सुशासन मॉडल 'न्यायप्रियता और प्रशासनिक दक्षता', 'पंच परिवर्तन से लोककल्याण', 'सांस्कृतिक पुनर्निर्माण से राष्ट्रजागरण', 'नारी स्वाभिमान-जागरण से समाज उत्थान' और 'सामाजिक कुरीतियों को चुनौतियों और उनका समाधान' को विस्तार रूप देता है।अनुशासनप्रिय शासिका अहिल्याबाई का रणनीतिक दृष्टिकोण दूरदृष्टि से भरा था। काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर और उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार के साथ ही पुनर्निर्माण को कौन भूल सकता है। सामाजिक भेदभाव समाप्त किया, उनके दरबार में हर जाति और समुदाय के लोग थे। अब मध्यप्रदेश सरकार ने इन्हीं विषयों पर कार्य करने के लिए एक वर्ष का रोडमैप भी बनाया है। देवी अहिल्या बाई होल्कर के अवदान पर अध्ययन और शोध के​ लिए कार्य किये जा रहे हैं। उनके महाराष्ट्र स्थित मूल गांव चौड़ी में विशेष दल भेजकर शोध कार्य करवाए जा रहे हैं। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसका नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे दूरदृष्टि, सुशासन, न्याय, शिक्षा, समाज कल्याण, धर्म कल्याण, जल संरक्षण और संवर्धन, निष्पक्षता का मॉडल लागू करके सीएम डॉ. मोहन यादव एक आदर्श राज्य की संकल्पना तैयार कर रहे हैं।




Wednesday, March 26, 2025

RSS, समाज और समरता का प्रगतिशील मॉडल

'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' स्थापना के 100 वां वर्ष तक कहां पहुंचा?


त्वरित विश्लेषण
डॉ. दीपक राय,
दैनिक मीडिया गैलरी, भोपाल
25 मार्च 2025
9424950144

Dr. Deepak Rai Article About RSS


दुनिया का सबसे बड़ा और पवित्र स्वयंसेवी संगठन 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के स्थापना का यह 100 वां वर्ष है। इतने दिनों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सफर कैसा रहा है? इसपर विश्लेषण की महती आवश्यकता है। हाल ही में बेंगलुरू में हुई तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सह सरकार्यवाह मुकुंद सीआर ने जो जानकारियां दी हैं, वह उत्साह से भरने वाली हैं।  संघ कार्य में युवाओं की रुचि बढ़ने के कारण उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। हर वर्ष लाखों युवा, विशेषकर 14-25 आयु वर्ग के संघ से जुड़ रहे हैं। आरएसएस ने 100 वर्षों में अथक अनुशासन के साथ जो सफर तय किया है उसी का परिणाम है कि देश में 51 हजार570 स्थानों पर प्रतिदिन शाखाएं संचालित की जा रही हैं। गत वर्ष जहां देश में 73,646 शाखाएं संचालित होती थीं, वहीं इस वर्ष 10 हजार बढ़कर 83,129 हो चुकी है। साप्ताहिक मिलन में पिछले वर्ष की तुलना में 4,430 की वृद्धि हुई है, जहां शाखाओं और मिलन की कुल संख्या 1,15,276 है। दैनिक शाखाओं की संख्या 83,129, साप्ताहिक मिलन 32,147, मासिक  मंडली 12,091 हैं। कुल मिलाकर यह संख्या 1,27,367 पहुंचना हर्ष का विषय है। संघ अपने शताब्दी वर्ष के दौरान कार्य के विस्तार में ग्रामीण मंडलों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। संघ ने संगठनात्मक योजना के तहत देश को 58,981 ग्रामीण मंडलों में विभाजित किया है, जिनमें से 30,717 मंडलों में दैनिक शाखाएँ और 9,200 मंडलों में साप्ताहिक मिलन चल रहे हैं। इस वर्ष देश भर में कुल 4,415 प्रारंभिक वर्ग आयोजित किए गए। इन वर्गों में 2,22,962 स्वयंसेवक शामिल हुए, जिनमें से 1,63,000 स्वयंसेवक 14-25 आयु वर्ग और 20,000 से अधिक स्वयंसेवक 40 वर्ष से अधिक आयु के थे। यह युवा संख्या उत्साहित करने वाली है। संघ वेबसाइट (www.rss.org) पर ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से साल 2012 से अब तक 12,72,453 से अधिक लोगों ने संघ से जुड़ने में रुचि दिखाई है, जिनमें से 46,000 से अधिक महिलाएं हैं। हजारों महिला कार्यकर्ता विभिन्न क्षेत्रों में संघ की विभिन्न गतिविधियों में कार्य कर रही हैं।

संघ ने हमेशा ही सामाजिक समरसता का मॉडल प्रस्तुत किया है। 1084 स्थानों पर स्वयंसेवकों ने मंदिरों में प्रवेश पर प्रतिबंध तथा एक ही स्रोत से पीने का पानी लेने पर रोक जैसी गलत सामाजिक प्रथाओं को समाप्त करने का प्रयास किया है। प्रयागराज महाकुम्भ में आने वाले लोगों के लिए निशुल्क नेत्र परीक्षण, चश्मे का वितरण तथा आवश्यकता पड़ने पर मोतियाबिंद की सर्जरी की व्यवस्था की गई। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि में भी संघ कार्यकर्ताओं ने बड़ी भूमिका अदा की है।  थर्मोकोल प्लेट या पॉलीथिन बैग मुक्त बनाने के लिए अनेक संगठनों के सहयोग से “एक थाली-एक थैला अभियान” चलाया जा रहा है। संघ द्वारा आज न केवल भारतीय हिंदू समाज को एकता के सूत्र में पिरोए जाने का कार्य किया जा रहा है बल्कि पूरे विश्व में अन्य देशों में निवासरत भारतीय मूल के हिंदू समाज के नागरिकों को भी एक सूत्र में पिरोए जाने का प्रयास किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह कार्य संघ के स्वयंसेवकों द्वारा संघ की शाखा में प्राप्त प्रशिक्षण के बाद सम्पन्न किया जाता है। आज संघ का देश के कोने कोने में विस्तार हो रहा है। संघ द्वारा विभिन्न श्रेणियों यथा चिकित्सक, अधिवक्ता, शिक्षक, सेवा निवृत अधिकारी एवं कर्मचारी, पत्रकार,  प्रोफेसर, युवा उद्यमी जैसी श्रेणीयों के लिए साप्ताहिक मिलन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने का नवाचार भी किया जा रहा है।  आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू सनातन संस्कृति को भारत के जन जन के मानस में प्रवाहित करने का कार्य करने का प्रयास कर रहा है ताकि प्रत्येक भारतीय के मन में राष्ट्रीयता की भावना जागृत हो एवं उनके लिए भारत प्रथम प्राथमिकता बन सके। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जिस आदर्शवाद का उदाहरण समाज के सामने प्रस्तुत किया है, उससे समाज के हर वर्ग में ग्राहता में तेजी से वृद्धि हो रही है। आने वाले वर्षों में इसके और भी उजले परिणाम हमारे सामने देखने को मिलेंगे।

(लेखक डॉ. दीपक राय "MY मध्यप्रदेश", "सोशल मीडिया राजनीति और समाज" पुस्तक के लेखक हैं, 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।)

जन्म दिवस विशेष : चीते की रफ्तार दौड़ते डॉ. मोहन यादव

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कितना सफर तय किया है?


विशेष लेख

डॉ. दीपक राय, भोपाल

दैनिक मीडिया गैलरी
25 मार्च 2025
9424950144



Dr. Deepak Rai Article for CM Dr. Mohan Yedav


मध्यप्रदेश के फुर्तीले, फिट, युवा, हंसमुख, सौम्यता से भरे, 13 चुनाव लड़कर अपराजेय रहने वाले, सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज जन्म दिन है। देश का एकमात्र चीता स्टेट मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी चीते की रफ्तार से सफर तय कर रहे हैं। कुछ लोग यह पढ़कर सोचेंगे कि मैं अतिशयोक्ति के साथ लिख रहा हूं। तो फिर चलिए, आपको प्रमाण भी दिये देते हैं। 13 दिसंबर 2023 को शपथ लेने के बाद क्या आपने ऐसा एक भी दिन देखा है कि जब डॉ. मोहन यादव ने छुट्टी ली हो? संवेदनशीलता की पराकाष्ठा देखिए जिस दिन उज्जैन में उनके पिता पूनम चंद यादव आखिरी सांसें ले रहे थे, तब भी डॉ. मोहन भोपाल के मंत्रालय में काम कर रहे थे।  यह कोई संयोग नहीं था, यह तो जीवन का प्रयोग था। समाज के लिए काम करने की यह जीवटता खुद पूनम चंद यादव ने अपने मोहन यादव को विरासत में सौंपी थी। 'काम करते रहो, जो दायित्व मिला है, उसे पूरा करो। आखिरी समय में सामने आईं पिता-बेटे के बीच हंसी-ठिठौली में भी पिता ने बेटे से कहा था- चलो जाओ अपना काम करो।' दायित्व के प्रति जुनूनी डॉ. मोहन यादव ने एक वर्ष तीन महीने 12 दिन के छोटे से कार्यकाल में कम कीर्तिमान नहीं रचे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव खुद तो सुबह से लेकर देर रात तक काम करते ही हैं, साथ ही साथ अपनी सरकार के मंत्रियों और विधायकों से भी खूब काम करवाते हैं। कल ही समाप्त हुए बजट सत्र के दौरान दो बार कैबिनेट हुई हैं। एक बार तो दिनभर विधानसभा की कार्यवाही, रात में कैबिनेट बैठक हुई। कर्त्तव्य पथ पर चलने का नया उदाहरण है। एक साल के संक्षिप्त कार्यकाल में तीन देशों की निवेश यात्रा हो, या फिर हर संभाग में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट। फिर भोपाल भी तो पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का साक्षी बना है।  

प्रदेश को सबसे बड़ी राशि वाला बजट मिला है। दुनिया में सबसे तेज दौड़ने वाले जीव चीता मध्यप्रदेश में फल फूल रहे हैं। डॉ. मोहन यादव भी तो चीता की तरह की रफ्तार से दौड़कर कामकाज कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन '4 वीआईपी और 4 जातियां' को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने मिशन बना लिया है।

Dr. Mohan Yadav Historical Photo


उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए और उससे भी पहले यूडीए, पर्यटन विभाग, शिक्षा विभाग में रहकर कई ऐसे निर्णय लिये हैं, जो बदलाव की बयार लेकर आए हैं। एक वर्ष में उन्होंने ऐसे कई क्रांतिकारी निर्णय लिए हैं, जो पूर्व की सरकारों ने कभी इतनी तेजी से नहीं लिये। सुशासन के लिए साइबर तहसील हो या हुकुमचंद मिल विवाद निपटारा या फिर नदी जोड़ो परियोजना। डॉ. मोहन यादव ने फ्यूचर रेडी मध्यप्रदेश की नींव रख दी है। विकास की इमारत दिखने में थोड़ा समय जरूर लग सकता है। उन्होंने इतने कार्य किये हैं कि सबकुछ जानने के लिए आपको मेरी किताब 'MY मध्यप्रदेश' पढ़नी होगी।

यह तो महज मील का एक पत्थर है, लेकिन मोहन यादव के लिए मंजिल पाने की राह उतनी भी आसान नहीं है। जैसे भारत में चीता प्रोजेक्ट कई चुनौतियां के वाबाजूद आज फल फूल रहा है। ऐसे ही राजनीति में चमकने के लिए डॉ. मोहन यादव के लिए यह साल परीक्षा की घड़ी होगा। इस साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में डॉ. मोहन यादव पिछड़ा वर्ग और यादव समाज के लिए देश का सबसे बड़ा चेहरा होंगे। बिहार में लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और उत्तर प्रदेश में सपा के अखिलेश यादव का गढ़ ढहाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खाटू, अनुशासित कार्यकर्ता डॉ. मोहन यादव के जिम्मे है। बिहार में सफलता मिली तो मोहन यादव भाजपा नेतृत्व के सबसे बड़े  राजनीतिक चहरों में एक होंगे। वे यह करने में सक्षम भी हैं क्योंकि

चुनावी और राजनीतिक रणनीति बनाने में वह माहिर दिखते हैं।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का छिंदवाड़ा का किला ढहाकर सभी 29 सीटें जिता चुके हैंं। हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा में प्रचार करके भाजपा की सरकार बनवाने में अहम भूमिका अदा की। जम्म-कश्मीर में भाजपा को जबरदस्त बढ़त दिलाई। हरियाणा में तो गृहमंत्री अमित शाह के साथ डॉ. मोहन को सीएम चुनने के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया था। यह मोहन यादव के बढ़ते कद की निशानी है। अब, बिहार एक निर्णायक मील का पत्थर साबित होगा। देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले पिछड़ा वर्ग के लिए डॉ. मोहन यादव सबसे बड़ा चेहरा बन सकते हैंं। मोहन की मंजिल उन्हें कहां ले जाएंगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन अब तक के कार्यकाल को देखने के बाद मैं इन पंक्तियों के साथ अपनी बात खत्म करना चाहूंगा...


कर्म की कलम से जिसने

खुद लिख्खी तकदीर,

इंसानियत जिसका धर्म,

सेवा उसकी आस्था,

शिक्षा का परचम थाम,

जिसने हर लक्ष्य को साधा।

महाकाल के भाल पर

गौरव तिलक लगाने वाला।

वो है ऐसा कर्मवीर...

वो है डॉ. मोहन यादव...

मुख्यमंत्री जी आपको जन्म दिवस शुभ हो... आप निरंतर प्रगति करें।

(लेखक डॉ. दीपक राय "MY मध्यप्रदेश", "सोशल मीडिया राजनीति और समाज" पुस्तक के लेखक हैं, 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं।)