सीएम डॉ. मोहन यादव के 2 वर्ष : विकास, सेवा और सांस्कृतिक अभ्युदय के दावों का डाटा एनालिसिस
डॉ. दीपक राय
मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव की प्रदेश भाजपा सरकार के कार्यकाल को आज 2 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह अवधि केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संकल्प और सिद्धि के बीच की एक गतिशील यात्रा दिखती है। सरकार का दावा है कि उसने 'विकास और सेवा' के मूल मंत्र को अपनाते हुए, प्रदेश को देश के विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कुछ तथ्यों के साथ उपरोक्त दावे का परीक्षण करना जरूरी है।
औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन : वर्ष 2025 को 'उद्योग एवं रोजगार वर्ष' घोषित किया गया है। 18 नई नीतियों की मंजूरी से राज्य में ₹32 लाख करोड़ से अधिक का निवेश सुनिश्चित हुआ और ₹8.57 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर उतरे। 'एमपी इंवेस्ट पोर्टल 3.0' के कारण मध्य प्रदेश सर्वाधिक निवेश प्रस्ताव लाने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया। इन्वेस्टर मीट से 23 लाख से अधिक रोजगार सृजन प्रस्ताव प्राप्त हुए। धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन हुआ, और 26 नए औद्योगिक पार्क/क्लस्टर को मंजूरी दी गई।
महिला सशक्तिकरण : लाड़ली बहना योजना की राशि ₹1,000 से बढ़कर ₹1,500 प्रतिमाह की गई, शासकीय सेवाओं में महिलाओं का आरक्षण बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया। देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन प्रारम्भ हुआ, और 62 लाख ग्रामीण बहनें आत्मनिर्भर हुईं।
गरीब कल्याण : गरीब कल्याण मिशन के तहत 1 करोड़ 33 लाख परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। इंदौर की हुकुमचंद मिल के श्रमिक परिवारों को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दशकों पुराना विवाद सुलझाया गया। स्वामित्व योजना से बड़ी संख्या में लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र मिले। मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना और PMGKAY के तहत करोड़ों हितग्राहियों को सहायता और निःशुल्क अनाज वितरित किया गया।
जनजातीय कल्याण : जनजातीय वर्ग के लिए बजट में 23.4% की बढ़ोतरी के साथ ₹40 हजार 804 करोड़ का प्रावधान किया गया। तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति मानक बोरा किया गया। पीएम जनमन योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट और आवास पूरे किए गए। सांस्कृतिक पहचान में, पचमढ़ी अभयारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर, और जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर किया गया। भगोरिया नृत्य, गोंड भित्तिचित्र कला और नर्मदा परिक्रमा को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया। 1,450 कि.मी. लंबे राम वन गमन पथ का निर्माण होगा। सिंहस्थ-2028 के लिए ₹2,005 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
किसान, पशुपालन : कृषि उत्पादन में मध्यप्रदेश दलहन, तिलहन, मक्का, टमाटर उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कृषक कल्याण मिशन और दाल मिशन को मंजूरी दी गई। पीएम किसान सम्मान निधि तथा सीएम किसान कल्याण योजना के तहत कृषकों के खातों में ₹48 हजार करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण हुआ। आपदा प्रभावित लाखों किसानों को ₹2,106 करोड़ से अधिक की राशि प्रदान की गई। किसानों को राहत देते हुए, गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बोनस दिया गया। 30 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। पशुपालन क्षेत्र में, “स्वावलंबी गो-शाला कामधेनु स्थापना नियम-2025” स्वीकृत हुआ और प्रति गो-वंश मिलने वाली राशि ₹20 से बढ़ाकर ₹40 की गई।
अधोसंरचना एवं परिवहन : सिंचाई क्षमता को वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। देश की पहली नदी-जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना का भूमि-पूजन हुआ। ऊर्जा में, मध्यप्रदेश सरप्लस की स्थिति में है, जिसमें फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट ने 278 मेगावॉट क्षमता से उत्पादन शुरू किया। परिवहन में, हवाई अड्डों की संख्या 8 हो गई है। अगले 5 वर्ष में 1 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा। NHAI और मध्यप्रदेश के बीच ₹1 लाख करोड़ का एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हजारों गांव लंबी सड़कों से जुड़े।
शिक्षा, स्वास्थ्य : मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। 6 लाख 18 हजार बच्चे दोबारा स्कूलों में जोड़े गए। सभी 55 जिलों में एक-एक मॉडल कॉलेज को पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में उन्नत किया जा रहा है। स्वास्थ्य में, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक संचालित हैं। 2 वर्षों में 84 लाख पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। युवाओं के लिए 2.5 लाख भर्तियों का लक्ष्य है। 'रोजगार दिवस' पर रिकॉर्ड 7 लाख युवाओं को ₹5 हजार करोड़ रुपये का स्व-रोजगार ऋण वितरित किया गया।
सुशासन : राजस्व महाअभियान चलाकर 1 करोड़ से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। साइबर तहसील परियोजना सभी 55 जिलों में लागू हुई, जिसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मिला। मध्यप्रदेश त्रुटिहीन फसल गिरदावरी कराने वाला देश का पहला राज्य बन गया। सर्वाधिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया गया है।
कानून व्यवस्था : देश में सबसे पहले 'ई-समन' व्यवस्था लागू की गई। नक्सल विरोधी अभियानों में 13 नक्सली ढेर हुए और 10 नक्सलियों ने सरेंडर किया। अब प्रदेश नक्सल मुक्त राज्य बन चुका है। पुलिस में शीघ्र ही 20 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होगी।
चुनौतियां भी कम नहीं : इन सफलताओं के बावजूद, सरकार के सामने कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं, जिनका हल तीसरे वर्ष में निकालना जरूरी होगा। कौशल और औद्योगिक मांग का समन्वय के लिए रिकॉर्ड औद्योगिक निवेश के लिए राज्य के श्रम बल के कौशल को नई तकनीकी मांगों के अनुरूप बनाना होगा।
बुनियादी ढांचे का अंतिम छोर तक विस्तार के लिए मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना जैसी परियोजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की गुणवत्ता और जल-जीवन मिशन जैसी योजनाओं को हर घर तक पहुंचाने में संसाधनों और निगरानी की निरंतर आवश्यकता है। योजनाओं के क्रियान्वयन में निरंतरता के लिए प्रशासनिक दक्षता और क्रियान्वयन की गति में निरंतरता बनाए रखना आवश्यक होगा। पर्यावरण और विकास का संतुलन रखने के लिए सर्वाधिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी और तीव्र विकास के बीच, टाइगर कॉरिडोर के संरक्षण और नदी संरक्षण को संतुलित करना जरूरी होगा।
इन चुनौतियों का हल डिजिटल गवर्नेंस का विस्तार और जनभागीदारी व निगरानी को मजबूत करके ही संभव है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपने तीसरे वर्ष के लिए चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष टास्कफोर्स बनानी होगी। 2047 तक विकसित भारत बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को पूरा करने के लिए सीएम डॉ. मोहन'आत्मनिर्भर' मध्यप्रदेश बनाने के लिए मिशन मोड में कार्य करना पड़ेगा क्योंकि विकसित भारत का रास्ता विकसित मध्यप्रदेश से होकर ही गुजरेगा।


