Thursday, January 15, 2026

अभिभावकों की उम्मीदों का 'दीपक'


विशेष लेख
डॉ. दीपक राय, दैनिक मीडिया गैलरी, 5 अप्रैल 2024, भोपाल।

'जन-हित प्रथम' सिद्धांत के साथ कार्य कर रहे जबलपुर कलेक्टर, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर कसी नकेल

IAS Deepak Saxena Best Work During Collector Period


'एक्शन स्पीक लाउडर देन वर्ड्स' इस अंग्रेजी कहावत का हिंदी अनुवाद है- 'कथनी से ज़्यादा करनी असर करती है।' अलग अर्थों में देखा जाये तो 'बातें कम, काम ज़्यादा।' हम संदर्भ के अनुसार इनमें से किसी का भी उपयोग कर सकते हैं। यह वाक्य मध्यप्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव और जबलपुर के कलेक्टर दीपक सक्सेना पर खरा उतरता है। जनवरी 2024 में जबलपुर कलेक्टर का पदभार संभालते ही, आईएएस दीपक सक्सेना ने अंग्रेजी की प्रसिद्ध कहावत 'एक्शन स्पीक्स लाउडर देन वर्ड्स' (Actions Speak Louder Than Words) को सही मायनों में चरितार्थ कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'स्वतंत्रता से काम' करने के आह्वान के ठीक दो महीने बाद, जबलपुर ने एक ऐसी घटना देखी है, जिसकी कल्पना आसानी से नहीं की जा सकती। 17 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही डॉ. मोहन यादव अपनी कार्यशैली में ब्यूरोक्रेसी पर कठोर नियंत्रण के लिए जाने जा रहे हैं। उन्होंने कई जिलों के कलेक्टरों को बदला है। इस प्रशासनिक फेरबदल का सीधा असर अब निचले स्तर तक दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ने 1 अप्रैल को एक बड़ा जनहितैषी आदेश जारी किया था, जिसका उद्देश्य निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाना था। इस आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि प्राइवेट स्कूल प्रबंधन किसी निर्धारित दुकान से ही किताब, यूनिफॉर्म या अन्य शिक्षण सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकता है। अगर ऐसा होता है, तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस आदेश के पहले ही जबलपुर में कुछ बड़े एक्शन की तैयारी चुपचाप चल रही थी और इसका नेतृत्व एक ऐसा अधिकारी कर रहा था, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी। उन अधिकारी का नाम था— दीपक सक्सेना। दरअसल, उन्होंने कलेक्टरी संभालते ही जिले में सुधार की कई पहल प्रारंभ कर दी थीं। जबलपुर की शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा और निर्णायक एक्शन भोपाल के बजाय जबलपुर में कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा लिया गया है। कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री के आदेश का तत्काल और कड़ा अनुपालन करते हुए जबलपुर की कुल 18 निजी स्कूलों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश दे दिया। यह कार्रवाई कोई सामान्य रूटीन जांच नहीं थी, बल्कि सीधे अभिभावकों से मिल रही गंभीर शिकायतों का परिणाम थी। दरअसल, दीपक सक्सेना ऐसे अधिकारी हैं जो सीधे जनता से मिलते हैं, कोई भी आम आदमी उनके मिलकर अपनी व्यथा सुना सकता है, सलाह दे सकता है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी सक्सेना कुछ सलाहों पर अमल भी लाते हैं। पिछले दिनों जबलपुर जिले के कुछ अभिभावकों ने अपनी शिकायतों में कलेक्टर को बताया था कि कई निजी स्कूल प्रबंधन उन्हें उनकी बताई हुई दुकानों से ही यूनिफॉर्म, किताबें और स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी खुलासा किया कि इन 'निर्धारित' दुकानों पर इन वस्तुओं की कीमतें बाजार मूल्य से काफी अधिक थीं, जिससे उन पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ रहा था। कलेक्टर सक्सेना ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया। उन्होंने एक गुप्त और त्वरित जाँच टीम गठित करवाई। जब जाँच में अभिभावकों की शिकायतें सही पाई गईं, तो उन्होंने बिना किसी देरी के, मनमानी करने वाले 18 स्कूलों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए। इस कार्रवाई ने न केवल जबलपुर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया है। एक ही झटके में इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों पर FIR दर्ज होना, कलेक्टर सक्सेना के सख्त और निडर प्रशासनिक रवैये को दर्शाता है। आईएएस

दीपक सक्सेना का प्रशासनिक रिकॉर्ड हमेशा से ही पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई का रहा है। जनवरी 2024 में जबलपुर की कमान संभालने के बाद, उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की है।

स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार: कलेक्टर सक्सेना ने जबलपुर के सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया और सुविधाओं में कमी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल फटकार लगाई। उनका जोर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारने पर रहा है।

सरकारी भूमि अतिक्रमण पर कार्रवाई: उन्होंने अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है, सरकारी जमीनों को मुक्त कराने और भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए विशेष अभियान चलाए हैं।

जनसुनवाई को प्रभावी बनाना: उन्होंने जनसुनवाई कार्यक्रमों को केवल औपचारिकता न रखकर, नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

लेकिन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर देश में पहली बार इतनी अच्छी कार्रवाई करने का श्रेय दीपक सक्सेना को ही मिला। प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ FIR की यह कार्रवाई, उनके 'जन-हित प्रथम' सिद्धांत को पुष्ट करती है। इस एक्शन ने न केवल अभिभावकों को बड़ी राहत दी है, बल्कि नौकरशाही में एक मजबूत संदेश भी दिया है कि सीएम मोहन यादव के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर सक्सेना की इस पहल पर अब हर जगह उनकी चर्चा हो रही है और उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में देखा जा रहा है जो केवल आदेश नहीं देता, बल्कि उन्हें कार्रवाई में बदलता है।

No comments: