Thursday, January 15, 2026

IAS Deepak Saxena : सिस्टम में सुधार, दीपक सक्सेना यादगार

 


विशेष लेख
डॉ. दीपक राय, दैनिक मी​डिया गैलरी, दिनांक 05 दिसंबर 2025,  भोपाल।


जनसेवा का यादगार अध्याय : जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना के तबादले से पूरा जबलपुर जिला हुआ भावुक

The excellent work done by Deepak Saxena during his tenure as Collector.


जबलपुर में कलेक्टर दीपक सक्सेना का कार्यकाल सुशासन की नज़ीर बन गया। प्रशासनिक सख्ती से स्कूल माफिया पर कार्रवाई हो, पुस्तक मेले का नवाचार हो, या रिकॉर्ड रूम को ऑनलाइन कर प्रदेश में नंबर वन स्थान हासिल करना—उनके जन-केंद्रित सुधारों ने जबलपुर के नागरिकों का दिल जीत लिया, अब जबकि उनका तबादला हो गया है तो पूरा जबलपुर जिला भावुक है, इस बात की तस्दीक सोशल मीडिया पोस्ट देखकर आसानी से की जा सकती है, जहां लोग अपने भाव प्रकट कर रहे हैं...


संस्कारधानी जबलपुर में लगभग 20 महीनों तक कलेक्टर रहे दीपक सक्सेना का कार्यकाल कभी न भुलाने वाला होगा।  जन-केंद्रित दृढ़ता और रचनात्मकता के साथ प्रशासन को बदलकर उन्होंने जिले में सुशासन की नई कहानी लिखी। प्रशासनिक सख्ती, जनसेवा, और विशेष रूप से 'स्कूल माफिया' के खिलाफ की गई ऐतिहासिक कार्रवाई के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने जो बड़े सुधार किए, वे न केवल मध्य प्रदेश के किसी जिले में पहले कभी नहीं हुए थे, बल्कि देशभर के लिए एक नजीर बन गए। अब वे जनसंपर्क आयुक्त की जिम्मेदारी संभालेंगे।

*प्रशासनिक सख्ती और 70 से अधिक कार्रवाई :* जबलपुर में अपने 20 महीनों के दौरान, कलेक्टर सक्सेना ने प्रशासनिक सख्ती का परिचय देते हुए भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और अनुशासनहीनता के खिलाफ 70 से ज्यादा कार्रवाई कीं। उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उनकी सख्ती का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कलेक्टर की कार्रवाई के चलते कई स्कूलों के प्रमुखों को जेल हुई और कई स्कूलों को अभिभावकों से ली गई अतिरिक्त फीस वापस करनी पड़ी।

*दुर्लभ अधिकारी, जिसने लोगों का दिल जीता :* दीपक सक्सेना का जब जबलपुर से भोपाल तबादला हुआ तो सोशल मीडिया पर नागरिकों ने खुलकर भावनाएं व्यक्त की। यह किसी अधिकारी के लिए दुर्लभ सम्मान है। मेरे पत्रकारिता के 16 वर्षों के अनुभव में, मैंने महसूस किया कि ऐसे अधिकारी विरले ही देखे हैं जिनके तबादले से नागरिक इतने दुखी हों। लोग चाहते थे कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उन्होंने जो सुधार किए हैं, वे कार्य हमेशा चलते रहें। लेकिन एक आईएएस अधिकारी हमेशा ही एक जिले का कलेक्टर नहीं रह सकता। बस यही उम्मीद है कि जो भी नया कलेक्टर आए वह इस नवाचार को आगे बढ़ाते रहे।

*रणनीति जिसने तोड़ी 'स्कूल माफिया' की कमर :* दीपक सक्सेना ने खुद सार्वजनिक रूप से बताया था कि उन्होंने अपने एक्शन को सफल बनाने के लिए एक खास रणनीति अपनाई। उन्होंने अलग-अलग डिपार्टमेंट को जोड़ा - पुलिस, एजुकेशन, रेवेन्यू। सबको अलग-अलग काम दिए और फिर लास्ट में एक लेवल पर लाए। उन्होंने बताया कि इसका प्रभाव बहुत अच्छा रहा। पुलिस के सहयोग से जो FIR दर्ज हुई और तत्काल अरेस्टिंग की जो कार्रवाई हुईं, उससे उसका मैसेज बहुत तगड़ा गया। यह कार्रवाई इसलिए भी सराही गई क्योंकि किसी दूसरे जिले में उस पर कार्रवाई कभी नहीं हुई थी, जिससे लोगों को भारी परेशानी थी।

पुस्तक मेला के नवाचार को मिला प्रदेशव्यापी रंग : सक्सेना के कार्यकाल का एक और महत्वपूर्ण नवाचार जबलपुर में आयोजित किया गया पुस्तक मेला था। यह पहली बार था जब कलेक्टर की पहल पर यह मेला लगाया गया, जिसमें डिस्काउंट रेट पर कॉपी किताबों के साथ स्कूल यूनिफार्म और स्कूल बैग की बिक्री की गई। इस नवाचार का उद्देश्य निजी स्कूलों, प्रकाशकों और किताब विक्रेताओं की साठगांठ को तोड़ना था। मेरी बहन, जो जबलपुर में रहती हैं, ने बताया कि पिछले वर्ष जो किताबें उन्हें ₹4000 में मिली थीं, वही किताबें पुस्तक मेले में उन्हें मात्र ₹1100 से ₹1200 में मिल गईं। यह बचत सीधे तौर पर नवाचार की सफलता को दर्शाती है।

कलेक्टर दीपक सक्सेना का कहना था कि यह जरूरी नहीं है कि हर बार राज्य सरकार ही आदेश जारी करे और उसका पालन किया जाए। कई बार जिला स्तर पर भी कोई नवाचार होता है तो राज्य सरकार उसको प्रदेश में लागू करती है। यही पुस्तक मेले के साथ हुआ।

प्रदेश सरकार से मिली सराहना : जबलपुर के पुस्तक मेले के इस नवाचार की राज्य सरकार ने भी तारीफ की। सरकार के स्कूल एजुकेशन विभाग ने तय किया है कि जल्द ही पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर ऐसी पुस्तक मेले लगाए जाएंगे। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला कलेक्टरों को दिये गये निर्देशों में कहा गया है कि अगर उनके जिले में निजी स्कूलों, प्रकाशकों और किताब विक्रेताओं की साठगांठ के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी हो रही है तो स्थानीय परिस्थितियों का आंकलन कर प्रत्येक जिले में उपयुक्त स्थान का चयन कर यथाशीघ्र इसका आयोजन किया जाए। दीपक सक्सेना का यह 20 महीनों का कार्यकाल बताता है कि एक अधिकारी कैसे जन-केंद्रित दृढ़ता और रचनात्मकता के साथ प्रशासन को बदलकर एक बड़ा और सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है, जिसकी छाप लंबे समय तक रहती है।  

रिकॉर्ड रूम हुआ ऑनलाइन, प्रदेश में 'नंबर वन' स्थान 

कलेक्टर दीपक सक्सेना ने प्रशासन में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अभूतपूर्व पहल करते हुए कलेक्टर कार्यालय के रिकॉर्ड रूम को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया। पहले, पुराने रिकॉर्ड फाइलों में धूल खाते पड़े रहते थे, जिन्हें खोजने में कर्मचारियों का काफी समय बर्बाद होता था। अब रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से यह प्रक्रिया सरल और त्वरित हो गई है, जिससे आम जनता और कर्मचारियों दोनों को लाभ मिल रहा है। दीपक सक्सेना की इस डिजिटलीकरण की पहल को पूरे प्रदेश में नंबर वन स्थान प्राप्त हुआ है और इसे अब सभी जिलों में लागू किया जा रहा है। उनका मानना है कि लोगों के साथ कम्युनिकेशन बढ़ाना और मेहनत पर भरोसा रखना ही सफलता की कुंजी है। दीपक सक्सेना की तबादले के बाद जबलपुर जिले के नागरिकों के मन में आने वाले भाव को शायर वसीम बरेलवी का यह शेर लाल बेहतर तरीके से प्रकट कर सकता है - 

"जहाँ जाएगा वहीं रोशनी लुटाएगा, 

इस चिराग का अपना कोई मकान नहीं होता।" 


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